कहाँ जा रहे हैं हम ?

कहाँ जा रहे हैं हम ?
खुद से दूर, खुदा से दूर ।
अपनों से दूर,
तो क्या पाओगे?
लौटे आओ खुद के पास,
खुदा के चरणोमें,
अपनों की गोंदमें,
तो सबसे कुछ पाओगे ।

कहाँ जा रहे हैं हमारे ?
संस्कृति से दूर,
समझ से दूर,
समाज से दूर,
तो क्या पाओगे ?
बनो संस्कारी,
बनो समझदार
करो समाज सेवा,
तो सब कुछ पाओगे ।

हम कहाँ जा रहे हैं ?
फर्ज से दूर,
कर्म से दूर,
सदगुणों से दूर,
तो क्या पाओगे ?
फर्ज ना भूलो,
सत्कर्म करो,
सदगुणी बनो,
तो सबसे कुछ पाओगे ।

हम कहाँ जा रहे हैं ?
घर से दूर,
देश से दूर,
दिल से दूर,
तो क्या पाओगे ?
घर को मंदीर बनाओ,
देश भक्ति जगाओ,
दिलदार बनो,
तो सब कुछ पाओगे ? विनोद आनंद

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Simplicity and high thinking

Simplicity and high thinking is unique quality

and Specialty of the person.

simplicity is best art of living. Simplicity means,

simple dressing and ordinary style of living,

simple nature and normal behavior.

High thinking means positive thinking

High thinking is symbol of development.

Shri Mahtma Ghandhi  is the rolled model

of the simplicity and high thinking.

still he inspires young generation.

simplicity and high thinking make you great.

Simplicity creates good human being quality

like love, mercy and philanthropy which

gives you progress, popularity and prosperity.

Simplicity and high thinking is very

easy, less costly and very impressive

which create good personality.

Be simple, be positive to become great.