कहाँ जा रहे हैं हम ?

कहाँ जा रहे हैं हम ?
खुद से दूर, खुदा से दूर ।
अपनों से दूर,
तो क्या पाओगे?
लौटे आओ खुद के पास,
खुदा के चरणोमें,
अपनों की गोंदमें,
तो सबसे कुछ पाओगे ।

कहाँ जा रहे हैं हमारे ?
संस्कृति से दूर,
समझ से दूर,
समाज से दूर,
तो क्या पाओगे ?
बनो संस्कारी,
बनो समझदार
करो समाज सेवा,
तो सब कुछ पाओगे ।

हम कहाँ जा रहे हैं ?
फर्ज से दूर,
कर्म से दूर,
सदगुणों से दूर,
तो क्या पाओगे ?
फर्ज ना भूलो,
सत्कर्म करो,
सदगुणी बनो,
तो सबसे कुछ पाओगे ।

हम कहाँ जा रहे हैं ?
घर से दूर,
देश से दूर,
दिल से दूर,
तो क्या पाओगे ?
घर को मंदीर बनाओ,
देश भक्ति जगाओ,
दिलदार बनो,
तो सब कुछ पाओगे ? विनोद आनंद

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