रास आ गई है

रास आ गई हैं जिन्हें मौज़ मस्ती,
उन्हें जिंदगी की कोइ कींमत नहीं ।
वो जिंदगी जी शकते हैं,
मगर जिंदगी को जीत नहीं शकते ।

रास आ गई हैं जिन्हें मन की गुलामी,
उन्हें बुद्धि की कोइ कींमत नहीं ।
वो जिंदगी जी शकते हैं,
मगर ईतिहास नहीं रच शकते ।

रास आ गई हैं जिन्हें दुर्गणो के संग जीने की,
उन्हें सदगुणो की कींमत नहीं,
वो नरक का बेताब बादशाहा बन शकते हैं,
मगर ज़नत का बेताब बादशाह नहीं बन शकते ।

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