प्रश्न ईश्र्वर ने ?

हे ईश्वर,  तेरी इस दुनिया में,
शैतान कहाँ से आया ?

ईश्वर ने कहा, हे ईन्सान,
जब भी तु भूलेगा ईन्सानीयत,
तब भी सोया हुआ शैतान जागेगा ।
मै ने तो ईन्सान बनाया,
तुमने सोये हुए शैतान को जगाया ।
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हे ईश्वर मैं मानव,
मानवी क्यूँ नही बन शकता ?
कौन रोकता है मुझे  ?

हे मानव, तेरा स्वार्थी, कपटी,
और भोग विलासी मन,
तुझे मानवी बनने से रोकता है ।

हे ईश्र्वर, उस का क्या है उपाय ?
हे  मानव तु मन को समझा,
वश  में करना और कहेना  :
” जो अच्छा है वोही करना,
जो बुरा है वो मत करना ।
अच्छा ही सोच,  बुरा मत सोच ”
तब भी तुम मानवी बन पाएगा ।

हे ईश्र्वर आभार,
मानवी बनछने का उपाय बताया आपने ।
मुझे देना आशीर्वाद की,
मैं मानव मानवी बन शकु  ।             
************
हे  ईश्वर तेरी दुनिया में सब दु:खी क्यूँ है ?

हे मानव सुख – दु:ख तो कर्मो का खेल है ।
मानव को कर्म करने की आजादी है ।
जैसा कर्म  करेगा, वैसा ही फल मिलेगा ।
मानव अपने स्वभाव से दु:खी होता है ।
विनोद आनंद

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