प्रेम ही परमात्मा

जहाँ प्रेम है, वहाँ है विश्वास
जहाँ विश्वास है, वहाँ है श्वास
जहाँ श्र्वास है, वहाँ है जिवन
जहाँ जिवन है, वहाँ है उद्देश्य
जहाँ उद्देश्य है, वहाँ है सफलता
जहाँ सफलता है, वहाँ है आनंद
जहाँ आनंद है, वहाँ है खुदा
जहाँ खुदा है, वहाँ है जन्नत
प्रेम ही रब है,  खुदा है,
इश्र्वर है और ईशाइ है ।            विनोद आनंद

मैं चाहता हूँ, वो हर शक्स चाहे

मैं  चाहता हूँ  धरती पर स्वर्ग,
मैं चाहता हूँ, वो हर शक्स चाहे  ।
तो धरती बनेगी स्वर्ग ।

मै चाहता हूँ  प्रेम की हवा चले
प्रेम ही श्वास बन कर
रोम रोम मे समा जाए ।
प्राणवायु करे खून शुध्ध ,
प्रेम वायु करे मन पवित्र ।
मैं चाहता हूँ, वो हर शक्स चाहे  ।
तो धरती  बनेगी स्वर्ग ।

मै चाहता हूँ स्वसुधार,
सही राह चूनी मै ने,
जिंदगी में चैन शुकून पाने की ।
मैं चाहता हूँ, वो हर शक्स चाहे  ।
तो धरती  बनेगी स्वर्ग ।

मै चाहता हूँ सद् भाव और सम् भाव
जगा ने को सब के दिलों में,
तो सद् आचरण और व्यवहार बने ।
मैं चाहता हूँ, वो हर शक्स चाहे  ।
तो धरती  बनेगी स्वर्ग ।

मैं चाहता हूँ मन का संयम
और इन्द्रियों पे काबू  ।
जिवन बने सुंदर, जग बने सुंदर
मैं चाहता हूँ, वो हर शक्स चाहे  ।
तो धरती  बनेगी स्वर्ग ।

चाहत से सफलता नहीं,
साधना से मिलती है सफलता ।
साधना जिवन बने,
तो धरती  बनेगी स्वर्ग ।         विनोद आनंद

हम किस में माहीर है ?

हम बहाने बना ने में,
किसी की गलतीयाँ निकाल ने में,
और अपनी गलतीयाँ छूपा ने में  माहीर है   । 

हम बातें कर ने में,
दिखावा, दंभ करने में,
और टीका, निंदा कर ने में माहीर है । 

हम दूसरों की हँसी उडा ने में,
नकल,स्पर्धा कर ने में,
और बहेस  कर ने में माहीर है ।

हम देखा देखी कर ने में
छल  कपट कर ने में
सलाह दे ने में माहीर है ।

अगर एसी ही बाबतों में
हम माहीर बने रहे तो,
हम महान नहीं बन शकते ।
जिंदगी जी लेंगे मगर,
जिंदगी को जीत नहीं शकते । विनोद आनंद

Anger

Anger is acquired nature.
We are peaceful soul.
Peace is our basic nature.

Due to unfavourable situation,
not fulfilling our desire,
problems and difficulties, 
contact with bad person
and hereditary from family
we become angery.

Man have capability
to face any situation,
and to solve the problem.
Does not get disturb yourself,
when some one get angery.
So you can remain peaceful
by putting affort.

Anger is destroyer and
killer of happiness and
create more problems.
At last we have to repent
and we have to say sorry.

So in any situation
Try to control the mood
and keep quiet so
Peace is maintained.

If you do not try to control anger
at initial stage it maybecome
your habit or nature.
So be careful about anger.
And try to suppress the anger.
                                              Vinod Anand