पता नहीं

मंजिल का प पता नहीं,
सफर पे निकल पड़े ।

उद्देश का पाता नहीं,
जिंदगी जी रहे हैं ।

घडी बँधी  हाथों  में,
समय का पता नहीं ।

घर से चले है,
कहाँ  जाना हैं पता नहीं ।

बोलना आगया,
कैसे बोलना हैं पता नहीं ।

चलना आगया,
टेढे मेड़े रास्ते पे चलना पता नहीं ।

जिंदगी जी रहे हैं,
लक्ष्य  का पता नहीं ।

लक्ष्य, उद्देश्य का और
मंजिल का पता चल जाये और
कैसे बोलना और चलना शीख जाए
तो जिंदगी जीना शीख जाओगे ।
विनोद आनंद 

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s