अब देर नहीं है

सूरज ढल रहा  हैं,
अब देर नहीं हैं ।
जीतनी गई सो ग्ई,
जीतनी बाकी उसका सोचो ।

पापों का करो प्रायश्वित,
पुण्य का हिसाब बढाओ,
वरना सूरज ढल रहा हैं,
अब देर नहीं हैं ।

कीतने आये और कीते गए,
कल आएगी बारी तुम्हरी,
होश में आओ और जाग जाओ ।
वरना सूरज ढल रहा हैं,
अब देर नहीं हैं ।

समय जा रह है,
विनोद आनंद की बातें है
ईश्वर का इशारा, संभल  जाओ ।
वरना सूरज ढल रहा हैं,
अब देर नहीं हैं ।

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