शेर शायरी का गुलदस्ता

जिंदगी मज़ाक नही है एक मक़सद हैं,
मक़सद को जिंदगी बनालो ।
जिंदगी मातंग नहीं हैं, उत्सव हैं,
हर दिन को उत्सव बनालों ।

जिंदगी एक खेल है, तुम हो खिलाड़ी,
जीओ खेलदिली से,
हार हो या जीत, करो स्वीकार  ।
जीत में  न हो अहंकार, हार में न हो निराश ।
जिंदगी उमीदों के बल पे जी जाती है,
बेउमीदों के बल से नहीं  ।

अभी अभी मेरे दिल में खयाल आया है की,
खयाल जिंदगी है या जिंदगी खयाल ।
अगर खयाल जिंदगी बन जाए तो,
जिंदगी  यादगार बन जाय ।
अगर जिंदगी खयाल बन जाए तो,
जिंदगी बेमिसाल बन जाए ।
                      
धन्यवाद
फूल खिला है डाली पे, 
मुश्करा के करता है  धन्यवाद माली का ।
तुम भी हो एक फूल,  किसी बगीयाँ का,
न भूलना करना धन्यवाद वाली का ।

पिंजरा
रास आ गया है जिन्हें संसार का पींजरा,
उनके जिन में कोई महान उदेश्य नहीं  होता ।
सब कुछ होता है मगर शुकून नहीं होता,
एसे ईन्सान का कोइ ईतिहास नही  होता ।

तन या मन
दर्पण में देख देख के जो सँवारते है तन को,
वो तो खाक में मिल जाएगा एक दिन ।
साँवेरना है तो मन को सँवारों, 
जो देता है साथ जन्मो जन्म,
और तुम्हे जिंदा रखता है,
मरने के बाद भी ।
                                                   विनोद आनंद

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