चलो तो कैसे ?

कुछ मान कर चलो,
कुछ जान कर चलो,
कुछ समझ कर चलो,
कुछ अनुभव से चलो,
किसी के कहने से चलो,
कुछ अपनी मर्जी से चलो  ।

कैसे भी चलो मगर,
सोच विचार कर चलो
और प्रेम की गंगा बहाने चलो  ।

ऐसे चलो के किसी को
कोई परेशानी न हो,
न हो किसी का अहीत और
सब को अपना समझ कर चलो  ।

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