अहंकार

अहंकार  है अँधेरा
न कुछ दिखता है
न कुछ सोचता है
अहंकार एक आतंकवादी ।

अहंकार है विनाशकारी
न कोई अपना है
न कोई पराया है
अहंकार एक खलनायक ।

अहंकार है रिश्तेदार
दुर्गुणों का और
दुश्मन सदगुणों
अहंकार एक शैतान ।

अहंकार है नास्तिक
खुद को ही समझे खुदा
दूसरों के प्रति है नफरत
अहंकार एक दानव ।
 
फिर भी पाला है अहंकार ईन्सान
और कहलाता है अहंकारी ।
अहंकारी नही पसंद किसी को ।
ईश्र्वर को भी नही पसंद अहंकारी ।

खलनायक,आतंकवादी ने नास्तिक
न बनो ईन्सान होकर ।
शैतान,दानव ने अहंकारी
न बनो ईन्सान होकर ।
ईन्सान है तो ईन्सान बनो ।
यही सफलता है जीवन की ।
यही सार्थकता है जीवन की ।

विनोद  आनंद                             05/01/2016
मित्र,फिलोसोफर, मार्गदर्शक

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