हार जीत

एक हारा तो दूसरा जीता
दोनों न जीत शकते न हार ।
कोई जीता तो कोई हारा
जीत का न हो अभिमान
हार का न हो गम ।

कभी हार तो कभी जीत
दोनों को अपनाना
खुसी को हार जीत का
मोहताझ न बनाओ ।
हर माहोल में खुस रहो ।

जीत कर तो सभी मुस्कराते है
हार कर मुस्कराना ही जिंदगी है ।
अपनी जीत पर सभी लेते है मजा
लेकीन दूसरो की जीत का मजा ले
वो हार कर भी जीता है ।

हार कर किसी की मुस्कान बन शकते हो।
जीत कर किसी को दुखी कर शकते हो ।
सोचो किस में मजा है ? हार में या जीत में ।

हार कमजोरी है सबळ बनो,
जीत की तैयारी करो ।
जीत में अकड न दीखाना,
और हार से बचके रहेना ।

पिता अपने बच्चे से हार कर खुस होते है ।
श्री राम खेल में बंधुओ से हार कर खुस होते थे ।
हार जीत के द्वंद में सकारात्मक अभिगम रखो ।

विनोद  आनंद                            09/01/2016
मित्र,फिलोसोफर, मार्गदर्शक

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