जिंदगी ऐक पाठशाला

जिंदगी ऐक अनोखी पाठशाला
न कोई रजा न वेकेशन,
रहे हमेशां चालू बारे मास ।
हर कोई शिक्षक, हर कोई शिष्य ।
शिष्य बन के रहा है हमे हमेशां ।

दुनिया एक अजीब विश्र्व विध्यालय ।
दुनिया में जो भी है वो सब,
हमे कुछ सिखाते है पाठ जीनेका ।
मगर हम है की, कुछ पता नही,
पता भी है तो चाहते नही समजना ।

कई महान बन गये दुनियामें
देकर महान बननेका तरीका ।
मगर हम नही छोडते,
तरीका अपना जीनेका ।

पशु-पक्षी की दुनिया भी है अद् भूत,
जो सिखाते है कई जीवनलक्षी बातें ।
कई शास्त्र, धर्मग्रंथ है जो देते है, 
उपदेश बस हमे रहेना है जागृत ।

बस रखना है कुछ सिखने का और
जीवन में सुधार लाने अभिगम ।
सिखना ही जिंदगी है और
सिखकर सँवरना है जिंदगी ।

विनोद आनंद                             28/02/2016
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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