फिर भी

कई दिवाली आई और मनाई,
हजारों दीप जलाए,
फिर भी अंदर है अंधेरा ।

कई होली आई और मनाई 
हजारों होली जलाई ओर बुझाई
फिर भी दिल से द्वेष की आग न बुझी ।

कई रक्षा बंधन आए और मनाए
हजरों राखी कलाई पर बंधवाई
फिर भी दूसरों की बहन की
ईज्जत करना नही शीखे ।

कई जन्माष्ठमी आई और मनाई
हजारो बार मंदिरों मे कृष्ण जन्म हुआ
फिर भी किसी के दिल में नही प्रगट हुए कृष्ण ।

कई रामनौमी आई और मनाई
हजारो बार मंदिरों मे राम जन्म हुआ
फिर भी किसी के जीवन में नही आए राम ।

कई नवरात्री  आई और मनाई
हजारों भक्त गरबे घुमे
फिर भी किसी का भी नही हुआ कल्याण ।

त्यौहार का अर्थ है जीवन में
शुभ-मंगल बदलाव या परिवर्तन
लेकीन त्यौहार मनोरंजन का जरीया बन गया है ।
अगर परिवर्तन या बदलाव नही तो त्यौहार कैसा।

विनोद आनंद                              25/03/2016
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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