अपेक्षा

अपनों से प्रेम, मान सन्मान
और कुछ पाने की तीव्र ईच्छा ।
कुछ देने के बाद बदले में
कुछ पाने की तीव्र ईच्छा ।
और जो चाहा, वो न मिला
तो दु:खी और परेशान होना ।
फिर संबंधो में दरार, उपेक्षा
और व्यवहार में बदलाव ।
अपनों से न कोई अपेक्षा रखना ।
कर्म किएजा और अपेक्षा की
उमीद मत रखना, तो न होगा दु:ख ।
अगर कुछ मिलजाए, तो होगी बडी खुशी ।
अपेक्षा ही  दु:ख, परेशानी और
झगडा का असली कारण है ।

विनोद आनंद                            01/06/2016
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

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