शेर शायरीयों का गुलदस्ता 15

​जख्म

जख्म तन पर हो या मन पर

दर्द होता है, दर्द से दोस्ती हो

तो शायद कम हो जाये दर्द ।

तन का जख्म दवाओं से मिटता है

मन का जख्म दूआओं से मिटता है ।

तन का दर्द मन तक न जाए और 

मन का दर्द तन तक न जाए तो 

कम हो दर्द का असर । 

जुल्म
जुल्म करना और सहेना

दोनों है गुन्हा ।

जुल्म करने वाले होते है कठोर 

जुल्म सहने वाला होता है डरपोक 

जिसे मिलता है बढ़ावा, 

जुल्म करने वालों को ।

हिमंत से करो मुकाबला ।

जुल्म को खत्म करने का

यही है एक तरीका ।
फिर भी

दुर्गुण कभी दोस्त नही फिर भी

हम उसे दोस्त समज़ते है ।

और गले लगाते है

सद् गुण कभी दुश्मन नही फिर भी

 हम उस से दुश्मन समज़ते है ।

उसे आंखे चूरा ते है ।

बस समज़ बदल दो ।

विनोद आनंद                             04/09/2016       फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

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