शेर शायरीयों का गुलदस्ता-18

​होस 

मन खोया स्वप्नो में, 

दिल खोया अपनों में, 

और मैं खोया हूँ खुद में ।

खोया हूँ मगर सोया नही ।

खोया हूँ मगर नसे में नही ।

खोया हूँ फिर भी हूँ होस में । 

जो भी करे होस में रहकर

तो सब कुछ होग सही ।

याद
याद रखना या याद करना

याद रखने कि कोशिश 

याद कर शकते है ।

याद रखा है फिर भी

याद न करना, है एक बहाना, 

याद न आना, है एक भूल ।

याद ही एकेलेपन का साथी है ।

संसार
संसार सुख का मीठा सागर

या दु:ख का खारा सागर ।

जैसी द्रष्टि एसा संसार, 

जैसा अभिगम एसा संसार ।

संसार में मन से  जिओ, 

मगर मन में संसार न रखो ।

जैसे नाँव पानी में तो ठीक

अगर पानी नाँव में तो गरबड ।

विनोद आनंद                                17/09/2016         फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s