Thank You

​I, Vinod Anand 

Firend, Philosopher, guide. 

Publishing my thoughts

in English, Hindi, Gujarati

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‘ Vinod Anand Thoughts ‘

since last fives years.

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I am very much inspire to

write more and more due

to good support from

follower,visit and viewer. 

I thanks to all and hope

Good feedback & likes in

future for better thoughts.  31/10/16

                 

गृहलक्ष्मी

गृहलक्ष्मी,लक्ष्मी कमाने गृह 

बहार निकले तो सुरक्षा कहाँ ?

नारायण-पति की सेवा छोड के

अन्य सेवा में जीवन खर्च करे,तो’

स्वधर्म,कर्तव्य में बाधा आएगी,

बाधा से संबंधो में तनाव, क्लेश,

अनबन और दुःखी होना,

क्या मुनासीत है ।

गृहलक्ष्मी गृह काम-परिवार कि

सेवा समर्पण करे तो सुरक्षीत,

स्वधर्म कर्तव्य का पालन तो

न कोई बाधा । लक्ष्मी नारायण

और सदस्य रहे प्रसन्न और घर

में सुख शांति, खुसखुसाल रहे ।

जिसे संसार में हलचल, छूटाछेडा

कि नौबत आए वो कार्य करना

मूर्खता कि निशानी है ।

गृहलक्ष्मी घर में  ही घर को

सजाने और सँवारने काम सँभाले

तो आदर्श परिवार,समाज बनेगा ।

अपनो कि सेवा छोड के दूसरों कि

गुलामी चंद पैसो के लिए क्या है

मुनासीत है कि पैसों के साथ

मुश्केलीयाँ, परेशानीयाँ खरीदे ।

समजदार को ईसारा काफी है ।

विनोद आनंद                            29/10/2016      फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड