तुम कहो तो ला दूँ

​तुम कहो तो चाँद तारे ला दूँ, 

तुम उस का क्या करोगी ? 

कहाँ रखोगी, सोचा है कभी ? 

तुम कहो तो समुदर में से

हीरे मोती ला दूँ,

तुम उस का क्या करोगी ? 

कोई पूछे तो क्या कहोगी ? 

सोचा है कभी ।

तुम कहो तो सारा जहाँ तुम्हारे

कदमो मे ला दूँ तो फिर 

तुम क्या करोगी कैसे निभाओगी 

रिश्ते सोचा है  कभी ? 

तुम कहो तो सारे जहाँ कि

खुसीयाँ ला दूँ क्या खुस होगी ? 

जब तक  तुम नही चाहोगी

कोई खुस नही कर शकता तुम्हे 

सोचा है कभी ? 

विनोद आनंद                            05/11/2016       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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