बहिर्मुख या अंतर्मुखी

​जिंदगी जीने का तरीका

बहिर्मुख है जैसे हमारी

सब इन्दियाँ बहिर्मुख है ।

हमारी जिंदगी पर भौतिक 

चीजों पर आधारित है ।

अपनी सोच भी बहिर्मुख है ।

हमे अपनी जिंदगी जीनेका 

तरीका अंतर्मुखी करना है

हम बाहारी चीजों से  शांति

और खुस रहेना चाहते और

आनंदित रहेना चाहते ।

हमे अतर्मुखी बन के अंतःकरण, 

मन, बुध्धि और आत्मा को

शुध्ध, पवित्र और शांत करना है

फिर अपनी जिंदगी बहार कि 

चीजों कि मोहताज नही होगी ।

बहार कि परिस्थिति कैसी भी

हो आप कि खुसी, शांति को

छीन शकता और आप कि जिंदगी 

सफल और सार्थक होगी ।

विनोद आनंद                               28/11/2016         फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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