Happy New Year 2017

​Happy New Year to All

2016 years has gone so far. 

Every year best wishes are

conveyed to each other for

Every new year, Is really it

become happy new year ? 

Only wishes are helpless

We have wish & pray to 

God for serious efforts so 

Year 2017 may turns to new. 

Every one must seriously 

think and put effort to make 

Year 2017 becomes New. 

But how ?  

To do so we have to forget

past & leave bad habits, 

bad qaulities & cultivate 

good habit & aquire good

qualities that is self 

improvement.

Make  your mind clean

& heart pure, Year 2017 

will sure become New. 

Best of Luck from me. 

Unless until you do so

wishes are ineffective. 

2016 Bye Bye & 

2017 Welcome. 

2017 साल मुबारक ।

Vinod Anand                         31/12/2016   Firend,Philosopher,Guide

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सोच समज़ कर वरना,,,,, 

​किस से क्या शीखे ? 

कोई किसी से शीखना 

नही चाहता ।

किसी को क्या सुझाव दे

कोई कुछ सुनना 

नही चाहता ।

किसी से क्या संवाद करे

सभी वाद विवाद करते है ।

कोई संवाद करना नही चाहते ।

किस से  दिल कि बात कहे

कोई दिल बात समजना नही चाहता ।

किस से अपनी परेशानी कहे

किसी को दूसरों कि फिक्र ही नही ।

किस से अपनी समस्या का 

समिधान पूछे ।

कोई समाधान नही चाहता ।

किस से अपनी खुशी सेर करे ।

किसी को दूसरों कि खुशी 

बरदास्त नही होती ।

किस से क्या प्रेम जताए

कोई प्रेम को समज नही चाहता ।

क्या करे, क्या न कर, कैसे करे ? 

जो करे वो सोच समज करे, 

वरना होगा धोखा और पस्तावा ।

विनोद आनंद                              31/12/2016     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

Shrimad Bhagawat Geeta – 16

Chapter-4 The Yoga of Knowledge as well disciplines of Action & knowledge.          He who sees inaction in action & action in inaction, is wise among men & yogi. Wise man call him Sage,who is free fromdesire, Sankalpa(thoughts of world) and whose actions are burnt up by the fire of wisdom. He,who,has given up attachment,fruit of action & is ever content,does nothing at all,even though fully engaged in action.   Having control his, senses & given up all objects of enjoyment, he who performs bodily action does not incur sin.The Karmayogi who is content with whatever he got,free from jealousy & transcended all pair of opposite like joy and grief & is balanced in success and failure is not bound by his action. who is free from attachment & has no identification with body  & free from feeling of mine,know the Self & who works for the of sacrifice. All his action are dissolved.  From: Shrimad Bhagawat Geeta.   conts. Happy New Year 2017. Wait for my next post “Shrimad Bhagawat Geeta-17 “

Vinod Anand                        31/12/2016   Firend,Philosopher,Guide

नही तो,,,, नही

​नींव मजबूत नही तो, 

मकान मजबूत नही, 

मकान सुरक्षीत नही है ।

रिश्तों में प्रेम नहीं तो, 

रिश्तों में प्राण नहीं, 

रिश्तें सुरक्षीत नही है ।

जीवन में सिध्धांत नही तो, 

जीवन में  सिध्धि नही, 

जीवन सुरक्षीत नही है ।

जीवन में नियम नही तो, 

जीवन नियमीत नही, 

जिंदगी सुरक्षीत नही है ।

मन पर संयम नही तो

मन स्थिर नही, 

मन दोस्त नही, 

मानवी सुरक्षीत नही ।

कर्म सही नही तो

मानवी सफल नही

नसीब सुरक्षीत नही ।

जुबा कडवी तो,  

प्रेम और शांति नही, 

व्यवहार सुरक्षीत नही ।

जिवन मजबूत  और 

सुरक्षीत हो ख्याल रहे तो

जीवन सफल और सार्थक हो ।

विनोद आनंद                              29/12/2016     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

भरोसा करे तो किस का ? 

​भरोसा करे तो किस का करे ? 

पहेले भरोसा खुद पे करे

खुद भरोसे के लायक बने

अपनो का भरोसा जीतना 

और अपनो पे भरोसा करना

लेकिन आंख खोल के, 

सतर्क और जागृत रहके ।

भरोसा करके चैन कि निंद न सोना ।

भरोसा कर लिया जिस पर

उसीने ही दिया है धोका यह

दुनिया का है दस्तूर याद रखना ।

दस्तूर, दास्तान न बने,सावधान ।

जिंदगी में भरोसेमंद बने 

भरोसा का इस्तमाल करेके

धोखेबाज न बने ।

एक बार उठ गया भरोसा

तो भी सब कुछ लूट जाएगा ।

फिर भरोसा जीत नही सकते ।

भरोसा रिश्तो कि नींव  है ।

विनोद आनंद                              28/12/2016     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड