सहन करना

​हम गरमी में छाँव चाहते है

और छाँव ठूंठते है ।

गरमी नही सह शकते

हम ठंडी में धूप चाहते है

और धूप ठूंठते है ।

ठंडी नहीं सह शकते ।

हम दु:ख में सुख चाहते है

और सुख ठूठते है  ।

हम दु:ख नही सह शकते ।

हम दूसरों कि गलतीयाँ

ठूठते है मगर खुद कि 

गलती नही देख शकते ।

हम नफरत में प्रेम चाहते है

और प्रेम ठूठते है  ।

हम नफरत नही सह शकते ।

हम अशांति में शांति चाहते है

और शांति ठूठते है ।

हम अशांति  सह नही शकते ।

हमे हर हाल और परिस्थिति में

सहन करना शीखना है और

परिस्थिति में बदलाव भी लाना है ।

सहन करना शीखने से जिंदगी

आसान बन जाती है  वरना जिंदगी

कठीन बन जाती है । 

विनोद आनंद                        09/12/2016          फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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