जिंदगी से बात-मुलाकात

​ये जिंदगी भी क्या जिंदगी है

जो एक पल भी जिंदगी से

बात न कर शके न कुछ पल

जिंदगी से मुलाकात न कर शके ।

कैसे मुनकिन है कि जिंदगी बसर होगी ।

जिंदगी से बात करने का मतलब

जिंदगी कि किंमत समजना 

और उसका ऋण चुकाने का सोचना ।

जिंदगी से मुलाकात का मतलब 

जिंदगी को लक्ष्य और आयोजन

से जिंदगी को शान से जीना ।

जिदगी के हर पहेलु को समजना

और हर बात और बाबतो पे गौर 

करना न किसी एक बात और 

बाबत को महत्व देना ।

और करना जिंदगी बेमिलाश, 

महान बने और दूसरो कि प्रेरणा बने ।

जिंदगी से हर पल बात और मुलाकात

करते रहो,जीते रहो और सफल होते रहो ।
विनोद आनंद                             13/12/2016      फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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