658 कोहरा

​शहर में जब कोहरा छा जाए, 

तब दिन में रात नज़र आती है ।

आखोंमें रोशनी है मगर बहार, 

न उजाला न अंधेरा एसा होता है, 

कि कुछ नज़र नही आता और

वाहन व्यवहार रूक जाता है ।

जब वातावरण में कोहरा दूर हो, 

तब सब कुछ पहेले जैसा होता है ।

लेकिन जब जीवन पर निराश, 

चिंता, तनाव का कोहरा छा जाए 

तो जीवन में अंधेरा छा जाए,

मायुस हो जाए और लड़खडा जाए ।

चिंता का कोहरा,चिंतने से

तनाव का कोहरा लक्ष्य और 

आयोजन युक्त जीवन से कम 

हो शकता है तब जीवन में

सब कुछ ठीक हो जाता है ।

वरना सब कुछ गलत  होता है ।

जब जीवन पर दुर्गुणो 

और खराब आदतों का 

कोहरा छा जाए तो जीवन में

अंधेरा छा जाए,मायुस हो जाए 

और लड़खडा जाए ।

दुर्गुणो और खराब आदतों का 

कोहरा,सद् गुणो और अच्छी

आदतों से दूर हो जाता है तब 

सब कुछ ठीक हो जाता है । 

वरना सब कुछ गलत  होता है ।

विनोद आनंद                         03/01/2016 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

 

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