679 पुरुषार्थ

धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष

चार पुरुषार्थ, जिंदगी का

आधार स्तंभ,सफलता और

किस्मत के विधाता ।

पहेला पुरुषार्थ धर्म शुध्धता,

पवित्रता, प्रमाणीकता और 

नैतिकता का आचरण ।

धर्म कि रक्षा और धारण करना ।

दूसरा पुरुषार्थ अर्थ कमाना

धर्म के अनुसार ईतना, जितना

जरूरी जीवन निर्वाह के लिए 

न ज्यादा का लोभ न लालच

बस जो मिले उस से संतोष ।

तीसरा पुरुषार्थ काम-वासना 

और ईच्छा का नियंत्रण ।

अति सर्वत्र व्रजेत ।

चौथा पुरुषार्थ मोक्ष

मोह का क्षय,मोक्ष-मुक्ति ।

त्रीनों पुरुषार्थ धर्म अनुसार

तो जीते जी मुक्ति – मोक्ष ।

ज्ञान,कर्म और भक्ति योग से

जन्म मरणा के फेरों से मुक्ति ।

विनोद आनंद                             25/02/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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