681 संबंध

संबध को संभालना, निभाना

बनाए रखना और मजबूत करके

जीना ही सही तरिका है जीनेका ।

लेकिन क्या हम ईस तरह का

जीवन जीते है, सोचो और जानो ।

संबंध में प्रेम,स्नेह,नि:स्वार्थ

कृतज्ञता,तितिक्षा,धीरज जेसै

सद् गुणो शामेल हो तो संबंध

संभलते है, सँवरते है और

मजबूत बनते है ।

तब जिंदगी जीने के योग्य

और काबिल बनती है 

वरना जिंदगी जीना पडता है

जिंदगी जी नही शकते ।

हमे परिवार मे संबंधो को

अग्रता और महत्त्व देना होगा

बाकि सब गौण समजे तो 

जीवन में सुख शांति बनी रहेगी ।

खुद के लिए नही जब हम

संबंधो के लिए जीएगें तब 

जीवनमें खुशाली-आनंद आएगा  ।

संबंध हमारे लिए नही 

हम संबंधो के लिए है ।

संबंधो को स्वार्थ, हरीफारी

सरखामणी, रागद्वेष, ईर्षा

कमजोर करते है टूटते नही

लेकिन तोड देते है, छोड़ देते है ।

जिंदा है मगर जिंदगी छीन जाती है ।

विनोद आनंद                             26/02/2017 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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