688 आत्म कल्याण 

चहरे पे हसी और

होठों पे मुस्कान तो

जीवन में खुशोयों कि बारात ।

आखों में नमी और 

मासुमीयत चहेर पे 

तो सुंदरता का श्रींगार

वाणी में मीठास और

व्यवहार में सरलता

तो अपनापण का अहेशास ।

विचारों में हकारात्मकता

भावनाओं में  शुध्धता

तो सत्कर्म का आरंभ ।

ईन्द्रियों पर संयम

मन पर संयम 

तो जीवन महान ।

जीवन में सद् गुण

और सद् आचरण 

तो उत्तम जीवन ।

जीवन में परोपकार

और ईश्र्वर भक्ति 

तो जीवन धन्य ।

पूर्व जन्म का फल  

भोगे शांति से और

पून:जन्म का अच्छा 

भाग्य घडे समजकर

तो आत्म कल्याण ।

विनोद आनंद                            06/03/2017 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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