691 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-23

😐बात

दिल में छूपी बात 

होठों पे आजाए

तो गज़ब हो जाए ।

लेकिन मन कि बात

जुबा पर आजाए

तो राज़ खूल जाए ।

कुछ भी छूपाना है

तो जूबा और होठों

को मत खोलो ।

अगर खोल ना है तो

पहेले सोचो ।

वरना लेने के देने 

पड जाएगें ।

🌷क्या समजे

हर वक्त मिलनेका वादा

इन्तज़ार बन जाए ।

तो क्या समजे, बेवफाई

या न आने का बहाना ।

कहते हो वो करते नही

करते हो वो कहते नही

तो क्या समजे, 

बुरी आदत या

गलत अंदाज ।

🌻सच जूठूठ का खेल

छूपती नही सच्छाई

जूठ्ठ के साये में, 

जूठ्ठ छूपता नही

सच्चाई को दबाने से

सच सच है,  

जूठ्ठ जूठ्ठ है ।

एक दूसरें को

एक दूसरों से

छूपाने कि कोशीश 

मत करना वरना

कहीं के नहीं रहोगे ।

विनोद आनंद                         09/03/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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