697 मर्यादा-निती नियम से जीओ

रूठना एसे कि पल में मानजाओ 

वरना मोसम बदल जाएगा ।

प्रेम करना एसे कि नफरत 

डर कर भाग जाए ।

कर्म करो एसे कि कर्म

अकर्म बन जाए ।

ईतना नाराज-उदास न हो कि

सुख शांति और प्रसंन्नता

भाग जाएगी ।

जीवन एस न जीओ कि

तुम्हारा नाम मिट जाए ।

प्रदार्थो को ईतना महत्त्व न दो

कि उस का नसा हो जाए ।

खुसी में न बहेक जाओ कि

संभलना हो जाए मुश्किल ।

दु:ख में इतना न हो परेशान कि

सहन शक्ति हो जाए खत्म ।

किसे से ईतान नफरत और ईर्षा

न करो कि तुम्हार बदन 

ज़हरीला हो जाए ।

रिश्तों से इतना न उलझना

कि रिश्तें कमजोर हो जाए ।

पैसे ईतना कमाओ कि 

जरूरतें सभी हो पूरी ।

स्वास्थ बेचकर पैसा न कमाओ

क्यूकि स्वास्थ है तो जीवन है ।

वाहन ईतना तेज न चलाओ कि

स्वास्थ-सुरक्षा खतरे में पडे ।

कुछ भी करो तो सोच समझकर

मर्यादा में निती नियम से करो

जीवन में सुख शांति और 

प्रसन्नता बनी रहेगी ।

विनोद आनंद                             12/03/2017 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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