741 खाना और निरोगी काया

खाना शरीर का पोषण  

खाना शुध्ध,पवित्र और 

सात्त्विक तो हो औषध 

और नियमीत सप्रमाण 

आहार तो शरीर हो निरोगी , 

वरना हो रोगो का निवास ।

उत्तम खाना घर का जो

माँ-पत्नि  ने बनाया प्रेमसे 

और खिलाया प्यारसे ।

कहाँ होगा एसा खाना और

प्यार बहार के खाने में ? 

पिता या पति का पसीना 

और शुध्ध भावना रिशतों कि

कहाँ होगी बहार के खाने में ? 

घर के खाने में होगी एसी 

शुध्धता पवित्रता और सात्त्विक

रहेगा शरीर निरोगी हमेंशा  ।

अच्छी चीजों से खाना शुध्ध, 

अच्छी भावनाओंसे खाना पवित्र, 

और अच्छे विचारों,आनंद और

ईश्र्वर के स्मरण से खाना 

बनाने से  बनता है सात्त्विक ।

फिर खाना ईश्र्वर को अपर्ण

करो तो बनता है प्रसाद ।

एसा खाना आनंद से और

ईश्र्वर का आभार मानकर 

खानाने से बनता है औषध, 

काया बनती निरोगी है ।

विनोद आनंद                              15/04/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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