744 अपनों से दूर या पास

अपनों से दूर है वो दरिद्र है

जो पास है वो है धनवान ।

अपनों से दूर है वो खुसनसीब है

जो पास है वो है बदनसीब ।

अपनों से दूर है वो खुश है

जो पास है वो है दु:खी ।

अपनों से दूर है वो नही 

पाते है स्पर्स प्यार का ।

जो पास है वो वो पाते

है स्पर्स अपनों के प्यार का ।

अपनों से दूर है वो नही पाते है

साथ सहकार अपनों का ।

जो पास है वो वो पाते

साथ सहकार अपनों का ।

अपनों से दूर है वो वंछीत है 

सेवा से अपनों कि ।

जो पास है वो पाते है

सेवा अपनों कि ।

सब कुछ पाकर अपनों 

से दूर तो, कुछ नही पाया ।

अपनों  का साथ जैसे 

ईश्र्वर का साथ ।          

अपनों  के पास जाओ,                                       

दरिद्रता दूर करो  

और धनवान बनो ।                                            

विनोद आनंद                               17/04/2017 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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