767 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-27

💖 मोहताज़

जैसे निंद मोहताज़ 

नही बिस्तर कि 

भूख मोहताज़

नही मिष्टान कि

एसे खुसी भी मोहताज़ 

न होन दूसरो पर ।

💚 मजबूर                                                       कमजोर है वो मजबूर है  

मजबूत है वो नही है मजबूर

 कमजोर को सभी सताते है

तन-मन से मजबूत है तो

उसे कोई नही सताता ।

वो कभी मजबूर नही है ।
💙 कोशीश

किसी कि जिंदगी को

आसान बनाने कि

कोशीश परोपकार है

किसी कि जिंदगी को

कठीन बनाने कि

कोशीश अपकार है ।

💜 समजदारी

ज्ञान से समज, 

समज से समजदारी, 

पति-पत्नि कि समजदारी से

घर मंदिर बनता है ।

समजदार पति-पत्नि के

बच्चे समजदार तो 

घर स्वर्ग बनता है ।

समजदारी स्वर्ग का द्वार ।

ना समजदारी नर्क का द्वार ।

विनोद आनंद                               07/05/2017

फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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