768 जीने का शलीका नही आया

ओ जीने वाले तुझे जीन का

सही शलीका नही आया ।

जीवन एक उपवन है तुने

कांटो का बन बना दिया ।

जीवन खूबसूरत है तुने

बदसूरत बना दिया ।

जीवन अनमोल है तुने

किंमत लगाली,बोली लगाली ।

जीवन का सफर आत्म

कल्याण के लिए है तुने 

काया कल्याण में लगा दिया ।

हे मानव ! तुझे जीन का 

सही शलीका नही आया ।

जीवन सेवा समर्पण के लिए

तुने खुद कि मावजत में  लगा दिया ।

जीवन, पुण्य आशीर्वाद और 

कृपा कमाने के लिए तुने पाप

और पैसा कमाने लगा दिया ।

जीवन ईश्र्वर मिलन के लिए तु

ईश्र्वर के वियोग में जीने लगा ।

हे मानव ! तुझे जीन का 

सही शलीका नही आया । 

जीवन सिर्फ जीना नही

जीवन को जीतना भी है ।

विनोद आनंद                               07/05/2017

फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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