775 जो भी करो….. 

जो भी करो सोच समज के, 

और एकाग्रता से करो ।

जो भी करो अयोजन से, 

समयसर और नियमीत करो ।

जो भी करो मन बुध्धि और

दिल कि सहमति से करो ।

जो भी करो आत्म विश्वास 

और होस में  करो ।

जो भी करो सब कि भलाई

और हीत के लिए करो ।

जो भी करो सफलता और

सार्थकता के लिए करो ।

जो भी करो लगन, मगन

और अगन से करो ।

जो भी करो सब कि खुशी

और शांति के लिए करो ।

जो भी करो किस के विरुध्ध

या बदले कि भावना से न करो ।

जो भी करो प्रसन्न चित और

आनंदित होकर करो ।

जो भी करो अच्छा करो

और शुभ करो ।

जो भी करो ईमानदारी

और निष्ठा से करो ।                                 

जो भी करो आन बान

और शान बढे एसा करो ।

विनोद आनंद                               14/05/2017 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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