787 खुशीयाँ ही खुशीयाँ

चहरे पर हसी नही तो खुशी 

कैसे आएजी जिंदगी में  ? 

चहरा गमगीन है तो सुख

कैसे आएगा जिंदगी में ? 

चहरे पे गुमान है तो मान

कैसे मिलेगा जिंदगी में ? 

चहेरे पे गुस्सा तो शांति 

कैसे आएजी जिंदगी में ? 

चेहरा रोतड तो हसी 

कैसे आएगी जिंदगी में ? 

चेहरा दंभी तो  सच्चाई

कैसे आएजी जिंदगी में ? 

चहेरे पे चिंता है तो चिंतन 

कैसे करोगे,चिंतन नही तो

कैसे जलेगी चिंता कि चिता ? 

चहेरे पे डर और भय तो कैसे

आएगी निर्भयता जिंदगी में ? 

चेहरा खामोसी तो होठों पे 

गीत कैसे आएगा जिंदगी में ? 

एसे चहरा से जिंदगी 

कैसे कटेगी कैसे सँवरेंगी ? 

होठों पे सिर्फ मुस्कान, 

चहेरे पे सिर्फ हसी होगी तो

जिंदगी में खुशीयाँ ही खुशीयाँ ।

विनोद आनंद                                 17/05/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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