790 लक्ष्य तयर करो

बीना पता और कुछ 

कुछ निशानी दे कर हम 

घर ढूँढते है, मगर 

घर नही मिलता ।

घर ढूँढना है तो पता

पहेले ढूँढना होगा ।

बस ईसी तरह हम

जिंदगी में  मंझिल ढूँढते है 

पर नही मिलती क्यूकिं 

लक्ष्य निर्धारीत नही है

हम लक्ष्य हीन जिंदगी के

सफर में  मंझिल ढूँढते है ।

जिंदगी में क्या बनना है

क्या करना है जिंदगी और

कैसे जीना है तयर नही है ।

तो फिर जिंदगी का कोई

हेतु या उद्देश्य नही होता ।

जिंदगी में  सफलता और

सार्थकता के लिए लक्ष्य 

निर्धारीत करना आवश्यक है ।

लक्ष्य हीन जीवन तो जानवर

जीते है । हम तो ईन्सान है ।

जिंदगी को लक्ष्य हीन न जीओ ।

विनोद आनंद                                 28/05/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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