823 तूफान

मन में है तूफान 

दिल में  है तूफान

अंदर है तूफान

बहार है तूफान

जिंदगी है तूफान

कस्ती जिंदगी कि

कैसे निकालोगे 

तूफान से बहार ।

दिल है पथ्थर

मन है शैतान तो

अंदर तो होगा तूफान ।

नही बसमें अपने 

बहार के तूफान को

शांत करना ।

है अपने बस में 

अंदर के तूफान को

शांत करना मगर कैसे ।

मन को छूडा ना है

इन्द्रिओ के पंजे से

मन को समजाना है

उनका का इन्द्रिओ

पे करना है काबू ।

अपना काम है, 

मन पे काबू करना ।

अंदर का तूफान 

होगा शांत तो

बहार का तूफान

हो जाएगा शांत ।

विनोद आनंद                                26/06/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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