839 कहाँ से लाओगे…. 

गाडी है बंगला है मगर

बंगले में शांति नही है तो

कहाँ से लाओगे….शांति ।

रिश्ते है,नए रिश्ते बनते है 

मगर रिश्तों में स्वार्थ है, 

कहाँ से लाओगे….प्यार ।

घर में गादी तकिया पलंग है ।

मगर रातों कि निंद नही, 

कहाँ से लाओगे…..निंद ।

लोग जीते है जिंदगी, 

मगर विश्वास नही, 

कैसे जीतोगे विश्वास, 

कहाँ से लाओगे…..विश्वास ।

लोग मिलते है हसते है, 

मगर सब दिखावा है, 

दिल में न दया न करुणा, 

कहाँ से लाओगे…..दया-करुणा ।

जिवन बीताते है लोग, 

कोई जीता नही जीवन, 

सिर्फ पैसा कमाते है लोग

कहाँ से लाओगे……दुआएँ ।

भोग विलास में है मस्त, 

वक्त कि कोई किंमत नही, 

कहाँ से लाओगे बीता वक्त ।

जीते है जीवन गलत तरिके से

फिर कहते है हम ठीक है

कहाँ से लाओगे…… 

सही तरिका जीनेका ।

कई जन्मो के बाद 

मानव जन्म मिला है ।

कहाँ से लाओगे….. 

दूबारा मानव जन्म ।

जरा सोचो यह सब

आपके पास है 

आपके बस में है 

बस प्रयास करना है ।

कहाँ से लाओगे…..प्रयास ।

विनोद आनंद                                08/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

 

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