901 फूरसद नहिं

लिख ने वाले लिखते है

अपनी अच्छि सोच को दूर 

दूर तक पहोंचाने के लिए ।

एसी उमिद से कि हर

कोई पढे और मन में 

ह्रदय में बसाकर एक 

अच्छि सोच बनाए ।

अच्छि सोच हि जीवन में 

अच्छे कर्मो का बीज है ।

लिखनेवाला अच्छि सोच का

बीज मन कि जमीन में  

बोना चाहता है जिसे 

जिंदगी में सत्कर्मो कि

फसल तैयार हो जिसे

जिंदगी में सफलता और

समृध्धि कि दोलत मिले ।

अच्छि सोच और अच्छे

सुविचार सभी को लगते है 

अच्छे मगर उस कि   

अच्छाई से जिंदगी को

सँवारने नी फूरसद नहि

किसी के पास और खुद में 

परिवर्तन लाने कि ईच्छा नहिं है । 

तो लिखनेवाला करे तो क्या करे  ? 

विनोद आनंद                                 30/08/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड 

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900 સાહિત્યકાર સમાજ નિર્માતા

સાહિત્યકાર મહત્વપૂર્ણ 

આદર્શ સમાજ નિર્માતા. 

જ્ઞાનનો ભંડાર, વિવેક 

વિચારો સભર કલમ દ્વારા

હિતકારી રચના પ્રકાશિત 

કરનાર ઉત્તમ સમાજ 

નિર્માતા, આદરનીય 

સાહિત્યકાર ને મારા

સત્ કોટી કોટી  પ્રણામ 

વંદન ને નમસ્કાર. 

નિ:ષ્કામ, વૈરાગી, નિસ્પૃહા, 

ન લોભ ન ડર હો, ન હોય 

પતિષ્ઠાની ભૂખ ને હોય 

સત્યપ્રેમી સાહિત્યકાર છે

એક આદર્શ સાહિત્યકાર ને 

એક આદર્શ સમાજ ને ધરતી 

પર સ્વર્ગ ના નિર્માતા . 

એવા સાહિત્યકાર ને 

મારા સત્ કોટી  પ્રણામ 

વંદન ને નમસ્કાર. 

આદર્શ સાહિત્યકારનું

સાહિત્ય વ્યક્તિત્વ 

વિકાસ, નિર્માણ, નિખાર

ને જીવનમાં સાધના 

માટે નું ઉત્તમ સાધન. 

સાધના પૂર્ણ માટે કેળવો

શોખ-ટેવ સાહિત્ય વાચવાંનો.. 

વિનોદ આનંદ                        27/08/2017 ફ્રેન્ડ,ફિલોસોફર,ગાઈડ 

899 Builder of Ideal Society

Society is collection of 

persons so each person is 

the builder of ideal society. 

So we all are responsible 

to built the ideal society. 

There are five professionals 

can build the ideal society. 

Teacher, religion Guru, ruler

writer-poet & social worker are

responsible to build ideal society. 

For students & youngsters 

teacher is  builder of

ideal citizens & society.

Next for  marriage life, 

religious Guru guide them for

art of living base on religion. 

Ruler can maintain peace

safety & harmony for the

welfare of society to build

ideal society. 

Writer-poet by their write up 

& poetry, he inspire persons 

to build good personality. 

Social worker to help & support

society whenever they needed. 

Overally each & every person

are responssible to build 

ideal society. 

Vinod Anand                          27/08/2017 Friend,Philosopher,Guide  

898 Teacher 

Teacher teaches & builts 

the future of student. 

Teaching is very good

prestigious  profession.  

Ideal teacher is the maker

of ideal citizen & can 

built the Ideal nation. 

He also teaches discipline, 

manners, culture of nation 

and art of living. 

Teacher is next to parent

and Guru for the student. 

First teacher must be ideal 

person and free from bad 

habits behaviuor & activities. 

Mean teacher must be 

rolled model for the student. 

First he should be perfect

student then with full of

knowledge in concern subject 

having art of teaching.

Teacher is base of education. 

If base is weak & corrupt then

education system will collapse. 

Vinod Anand                               26/08/2017 Friend,Philosopher,Guide  

897 जिंदगी जंग के स्वर्ग

जिंदगी जंग हम सिपाही ।

रहना है जागृत,चौकना और 

तैयार दुश्मनों से जंग खेलने को ।

अंदर दुश्मन, बहार दुश्मन ।

घर में दुश्मन,समाज में दुश्मन 

जहाँ आँख खोल के देखो

दुश्मन ही दुश्मन देखाई देंगे ।

जिंदगी को जंग बना देते है ।

अंदर के दुश्मन है….. 

काम, क्रोध, लोभ, मोह, 

मद और मत्सर-ईर्ष जो देते है

बहार के दुश्मन को जन्म ।

ईसलिए पहेले जंग खेलकर 

उन पर जीत हासील करनी है ।

फिर न होगा कोई बहारी दुश्मन ।

कैसे खेलेंगे जंग अंदर के दुश्मन से ।

जीवन में दुर्गुणो से मुक्ति, 

बूरी आदतों छूटकारा पाकर

सद् गुणी बनकर अपने 

व्यक्तित्व को निखारना है

सवाँरना है और जिंदगी का

जंग पर जीत हांसल करनी है ।

फिर न होगा कोई दुश्मन ।

सभी होंगे दोस्त फिर जिंदगी 

जंग नही है, जिंदगी स्वर्ग है                                     विनोद आनंद                                24/08/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड 

895 कर्तव्य निष्टा

जब माँ अपने बेटे का हित न चाहे 

पिता उनका भविष्य न सँवारे

मित्र दोस्त का भला न चाहे

शिक्षक स्कूलमें विद्यार्थी को

अच्छी तरह न पढाए ।

जब नावमें सफर करे और 

नाविक ही नाव डुबोए, 

अपने धोखा दे,नफरत करे ।

शासक हि बने शोषक ।

और रक्षक भक्षक बने, 
रक्षक भक्षक बने ।

तो क्या परिणाम आएगा ? 

सब जगह संघर्ष क्लेश और

अशांति और समस्याए होगी ।

क्या एसा होना उचित है ? 

एसा क्यूं होता है ? सोचा है? 

यह सब अपनी बेजिम्मेंदारी 

और स्वार्थ का नतीजा है ।

जब कोई भी अपना काम

निष्टासे नहीं करता तब 

घर में, समाज में और 

देश में  अशांति,अविश्र्वास

और समस्या जन्म लेती है ।

उसका एक ही सरल उपाय

सभी अपनी अपनी जिम्मेंदारी

सभजकर कर्तव्य निष्टा से निभाए ।

विनोद आनंद                                 23/08/2017   फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

896 स्थिति-परिस्थिति 

स्थिति, परिस्थिति दो

पहेलु है जो जीवन को

सँवारती या बीगाडती है ।

परिस्थिति बहार कि बात है 

और स्थिति अंदर कि बात है ।

दोनों एक दूसरे को 

प्रभावित कर शकती है ।

फर्क यह है कि स्थिति 

पर हम काबू कर शकते है, 

परिस्थिति पर नहीं ।

परिस्थिति को समजकर

स्थिति न बदले तो परिस्थिति 

बेअसर हो शकती है  ।

आंतरिक स्थिति शातं और

प्रसन्न हो तो परिस्थिति को

प्रभावित कर शकती है ।

बहार कि परिस्थिति चाहे

कैसी भी हो मगर मनः स्थिति

न बदले तो परिस्थिति को

बदलने कि मनुष्य में क्षमता होती है ।

मगर हर पल याद रखना कि

हो शके तो परिस्थिति को

बदने कि कोशिश करो 

अगर न बदल शको तो

परिस्थिति का स्वीकार 

करने में  ही समजदारी है ।

मनः स्थिति समतुलित रहे तो 

परिस्थिति बेअसर होती है ।

विनोद आनंद                                23/08/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड