863 होना है सार्थक

फूलों का कहेना है

मेरी तरह खिलो

मुश्कराओ और महेंको

तो मेरा होना है सार्थक ।

तरों का कहेना है 

मेरी तरह आशमान छूओ

चमको, प्रकाशित हो और

धरती के तारे बनके चमको

तो मेरा होना है सार्थक ।

नदियों का कहेना है

बहते रहो, 

आगे बढते रहो

लक्ष्य के लिए 

बाधांए पार करते रहो

तो मेरा होना है सार्थक ।

पेडों का कहेना है 

मेरी तरह किसी को

धूप में छाँव दो, फल दो

और जरूमंद को आश्रय दो

तो मेरा होना है सार्थक ।

पर्वते कहते है 

मेरी तरह अडग रहो

द्दढ, मजबूत बनो और

अपने लक्ष्य पर डटे रहो 

तो मेरा होना सार्थक हो ।

सब कुछ न कुछ कहते है 

मगर हमारे पास वो कान

कहा है जो सुन शके ।
विनोद आनंद                                31/07/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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