864 निरीक्षण करो

हम कैसे जीते है ? 

जरा निरीक्षण करो, क्या 

हम विचार शून्य जीते है ? 

कुछ भी बोले या करो तो, 

पहले करो विचार कि

सही है, तो बोलो या करो ।

तो जीवन विचार शून्य नही है ।

क्या हम लक्ष्य हीन जीते है ? 

जीवन में क्या बनना है ? 

जीवन कैसे जीना है

पहेले से तय होना चाहीए

फिर जीवन जीना है ।

तो जीवन लक्ष्य हीन नही है ।

क्या हम रोते हुए 

दुखी होते जीते है ? 

कुछ भी मिले और

कुछ भी हो  वो हमारे

कर्मो का फल है ।

हमे हसी खुशी से

सहन करना है और

कुछ हकारात्मक सोच से 

अच्छा करना है तो 

भविष्य हो खुश खुशाल तो

जीवन रोते हुए, दु:खी न हो ।

हम कैसे जीते है ? 

खुद के निरीक्षण में  जीओ ।

विनोद आनंद                                01/08/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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