867 शेष अन्न

दाने दाने पे लिखा है

खानेवाले का नाम ।

मगर कुछ कमनसीब

दाने होते है उस पर किसी का

नाम नही लिखा होता ।

वो किसी कि भूख नही मिटाता ।

ईन्सान के खाने के बाद जो शेष

बचता है वो ईन्सान  ईधर उधर 

फेंक देता है और किसी के मुखका 

निवाला नही बनता शकता ।

वाहनो तले कुचल जाता है या 

कचरे के डीब्बे में सड जाता है ।

ऐसे दाने पर हमे किसी का नाम

लिख के उसी को खिलाना है, 

नही के बेजिम्मेदारी से 

ईधर उधर फेंकना है ।

एसा करने से तुम्हे पुण्य मिलेगा

और किसी का पेट भरता है ।

कोई भी दाना एसा न हो जिस पे

किसी का नाम न लिखा हो ।

शेष अन्न किसी भूख मिटाए

एसा करना हमारा फर्ज है ।

फर्ज निभाओ और कर्ज चुकाओ ।

विनोद आनंद                              03/08/2017      फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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