1020 Art Of speaking

What to speak ? 

How to speak ?

When to speak ? 

Why to speak ?

Whom to speak ? 

Which suitable

words to be used 

while speaking  ? 

If you speak after 

getting right answer 

of these questions,

then Really it is right   

way of speaking.

Means whenever

required to speak

think before speak.

Speak such way that

it should be effective

impressive.

Avoid loose,unrequired

meaningless talk and 

develop Art of speaking.

You have to practice 

such Art of speaking.

Be a good speaker.

Vinod Anand                             30/12/2017   Friend,Philosopher,Guide    

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1019 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-50

🌹 मिलते रहेना

मिलते रहने से मन भी मिलेगा

दिल भी मिलेगा, रिश्ते भी बनेगे 

जीवन भी बनेगा और सँवरेंगा 

तो मिलते रहेना और जीते रहेना ।

🌻 रिश्तों का टिकना 

रिश्ते टिकते है टिकाने से

प्रेम और त्याग से 

टिकते है रिश्ते ।

बरदास्त और समज से

टिकते है रिश्ते ।

स्वार्थ से दूरी और 

क्रोध से दूरी से 

टिकते है रिश्ते ।

माफि और स्वीकार से

टिकते है रिश्ते । 

निभाने से और झुक जाने से

टिकते है रिश्ते ।

विश्र्वास और द्दढ निश्चिय से

टिकते है रिश्ते । 

रिश्तों के टिकने से 

टिक जाता है जीवन वरना

टूट के बीखर जाता जीवन ।

❤ टूटते है रिश्ते 

हक और अधिकार 

मागने से टूटते है रिश्ते ।

वादविवाद और कटू 

वचन से टूटते है रिश्ते ।

गेरसमज और बेजिम्मेदारी से

टूटते है रिश्ते ।

दुख में और तकलीफ में

साथ न दे से टूटते है रिश्ते ।

स्वार्थ, दंभ और अभिमान से

टूटते है रिश्ते ।

ना समज और जिद्द से

टूटते है रिश्ते ।

रिश्तों के दुश्मनों से दूर 

रहने से टूटते नही रिश्ते ।

विनोद आनंद                              29/12/2017       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

1018 नया साल 2018 को नज़राना

आशीर्वाद और नए साल का 

नया नज़राना विनोद आनंद से ।

नया साल मुबारक हो ।

आप का नया साल नया,

दमदार,उत्साहीत,सुखमय,

शांतिमय और सफल बने ।

साल को नया बनाने का 

संकल्प करो, नये साल को

नया बनाकर अच्छा जीवन 

बनाने का लक्ष्य रखो ।

निर्णय करो, निश्चिय करो

और अपनालो तरीका नये 

साल को नया बनाने का ।

क्या है तरीका ?

मन को नया बनाने को

भर दे मन में नई सोच जो 

पुराना मन के प्रोगम को

बदल कर नया प्रोगम बनाए ।

पहेले कि गलत सोच,मान्यता,

भावनाए, विचार,स्वभाव और

आदतों के पौधे को उखाड फेंके ।

मन कि जमीन पे अच्छि सोच,

विचार,मान्यता,स्वभाव,और

आदतों का नया बीज बोना है ।

प्रयास,धीरज, विश्वास से करो

नया साल में अच्छाई कि फसल 

साल नया बन जाएगा ।

ईश्र्वर से प्रार्थना कि नया सला

सब का नया बने यह तरीके से ।

गलत को छोडो अच्छे को अपनाओ ।

नये साल को नया बनाने का 

तरीका नज़राना होगा सफल ।

विनोद आनंद                              16/12/2017       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

1017 Devotee

Who devotes his 

time to God for payer

with faith & trust he is

devotee of God.

He believe God and

surrender his action to

God what ever he does.

He becomes devotional,

religious & spiritual person.

Whatever he gets he accept

with pleasure & thanks God.

He pray & remember God in

sorrow & pleasure situation.

He is love every one but

never hate any one,

pray God for welfare of

every one & help every one.

Devotee also carries his

responsibility of family.

Vinod Anand                             27/12/2017     Friend,Philosopher,Guide   

1016 Art Of Purchasing

Purchasing is essential &

important aspect of the life.

It is necessary to know the

Art of Purchasing for max.

benefits, optimum use &

justification of your money.

Otherwise waste or dead

investment of earned money.

Golden rules to know and

to develop Art of purchase.

Know value of earned money.

No waste or dead investment

of your earned money.

Justify purchased items and

money paying for item.

Before purchase any things

know about it’s requirement

reliability & it’s actual price.

Do not be tempted by sale

& scheme in the market.

Don’t be so hurried, take

time to decide for purchase.

Purchasing should not  be

hobby or habit or prestige.

Purchasing of thing should

be essential, required and

your capability to Purchase.

Art of Purchasing can control

the flow of money and save

earned money for future.

Vinod Anand                             25/12/2017   Friend,Philosopher,Guide   

1015 સમજવું તો જોઈએ

પોતાને સમજવું, 

સંબંધો ને સમજવું,

સંબંધીઓ ને સમજવું,

બીજાને સમજવું,

પોતાનાને,સમજવું ને

ઈશ્ર્વરને સમજવું તો જોઈએ.

સમજ એક દૌલત.

સમજ જ્ઞાન,બુધ્ધિ સારે 

વિચારોથી આવે છે.

સમજ કરે ગેરસમજ દૂર.

સમજથી વધે સમજદારી .

એટલે સમજવું તો જોઈ.

જે સમજે એ સમજદાર.

સમજદારી કરે દરેક 

સમસ્યાનો હલ આસન.

સમજદાર ન કરે અભિમાન.

સમજદાર કરે સમાધાન.

સમજદાર ભૂલ માફ કરે

ને માંગે પણ ભૂલની માફી.

જ્યાં સમજ ત્યાં શાંતિ ને

જ્યાં શાંતિ ત્યાં સ્વર્ગ.

સમજો ને સમજાવો તો

પરિવાર બને આદર્શ.

એટલે સમજવું તો જોઈ.

વિનોદ આનંદ.                        24/12/2017 ફ્રેન્ડ,ફીલોસોફર,ગાઇડ

1014 चलना तो चाहीए

चलना तो चाहीए क्यूँकि

चलना ही उत्तम कसरत है ।

शरीर के सभी अंगो को 

मिलती है कसरत और

आती है  शरीर में स्फूर्ती ।

ईसलिए चलना तो चाहिए ।

बैठे रहनेशे मनुष्य आलशी

और शरीर मोटा हो जाता है ।

चलते चलते कई लोगों से,

मिलना और पहेचान होती है ।

चलने से शरीर कि रोग 

प्रतिकारक शक्ति, बढती है 

और बीमारी कम होती है ।

ईसलिए चलना तो चाहिए ।

सुबह के स्वच्छ-शांत माहोल में

चलने से शरीर को शुध्ध हवा,

और मन को शांति मिलती है ।

जीवन में चलने कि आदत होनी 

चाहीए तो शरीर स्वस्थ रहेगा ।

ईसलिए चलना तो चाहिए ।

विनोद आनंद                              23/12/2017       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड