1047 तराझु

बचो पाप से पल पल तो
होगा सूर्योदय पुण्य का ।
फिर होगा पल पल पुण्य ।
पाप कि हस्ति को मीटाना है ।
पुण्य का सामराज्य बनाना है
मगर कैसे बचे पाप से हर पल ?
हर पल जो भी बोले या कर्म करो
उसे पाप-पुण्य के तराझु में तोलो ।
भारी हो पाप का पल्ला तो,लगाओ
ब्रेक, रूक जाओ पाप नही होगा ।
पुण्य का पल्ला भारी तो, आगे बढो
पुण्य का हिसाब बढता जाएगा ।
जीवन मे सूर्योदय होगा पुण्य का ।
पाप पुण्य कि किताब है जिंदगी,
किताब लिखता है उपर वाला ।
लिखाने वाले सिर्फ हम हि तो है ।
ध्यान रहे, याद रहे, सावधान रहे ।
यही तो है सही तरीका पल पल
पापो से बचने का, आजमाईए ।
विनोद आनंद 23/01/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

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