1001 કરકસર

” ત્રેવડ ત્રીજો ભાઇ ”

વલણ કરકસર કરવાનું 

આવડત કરકસર કરવાની

કરકસર એ કસી કસીને 

કરવો જરૂરી જ ખર્ચ .

કરકસર એ નિયંત્રણ 

ખર્ચને બજેટમાં રાખે .

કરકસર મધ્યમ માર્ગ 

ન કંજુસ ન ઉડાઉ.

કરકસર કમાઉ બેટા.

ખર્ચ સહી કે યોગ્ય છે

તો કરવો,એ કરકસર.

કરકસર રોકે પૈસાનું 

ડેડ ઇન્વેસ્ટ.

કરકસર જરૂરી મોંઘવારીમાં.

કરકસરથી થાય બચત 

ને થાય સંકટમાં ઉપયોગ.

કરકસર કરો ને આર્થિક 

સમસ્યાનું કરો સમાધાન. 

વિનોદ આનંદ.                        11/12/2017 ફ્રેન્ડ,ફીલોસોફર,ગાઇડ

Advertisements

1000 Vertical Vs Lateral Thinking

Vertical Thinking is selective &

logical.Lateral Thinking is 

different & generative 

Vertical Thinking is traditional 

& Lateral Thinking is creative.

Selection  of suitable option 

from available options is 

Vertical Thinking 

Lateral Thinking creates many

options for optimum selection.

Lateral thinking need practice 

& high Intellegent Quotient-I.Q.

Vertical doesn’t require high I.Q.

but require knowledge and 

exprience for better selection.

For modification & innovation

Lateral thinking is vary useful.

Age of competition both type

of thinking are essential to

complete the present situation.

Vinod Anand                           10/12/2017 Friend,Philosopher,Guide    

999 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-49

🌷शब्द

शब्दों में ताकात होनी चाहीए

शब्दों में आवाज़ नही ।

फूल बारीश से खिलते है

बाढ से नही खिलते । 

🌻 जीवन क्या है ?

जन्म मरण के 

बीच का समय है ।

वर्तमान और भविष्यका

समय पास है तुमहारे ।

भूतकाल कि याद में

भविष्य कि चिंता में

समय न बीगाडना ।

लक्ष्यहीन, बीना आयोजन 

जीवन जी के, समय का 

बीगाडा न करो ।

समय का बीगाडना जीवन

को बीगाडना,समय किंमत 

समझो और समय का 

सदोपयोग करो ।

🌹 मुनकिन है

मुनकिन है, पाने को जो चाहो

पता नही तुम को क्या चाहिए ?

पहेले निश्चिय करो जो चाहिए

फिर पाने का रास्ता बनाओ 

चल पडो मंझिल कि ओर 

रुकना नहि, मंझिल मिलने तक

तो,मुनकिन है जो पाना चाहो ।

विनोद आनंद                              10/12/2017       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

998 Improvement

Improvement is the 

high way of progress & 

development.

Improvement is continuous

process of development.

Improvement in relation

business, personality 

& every aspect of life

must be done for better

result & performance.

To improve relations 

see & understand other 

person’s point of view

To improve personality

acquire human qualities

good habits & good deed.

To improve bussine do 

modification, innovation

& improve services.

Motivations & inspiration

is tools for improvement.

Improvement is tools of

development & progress.

Vinod Anand                           09/12/2017 Friend,Philosopher,Guide    

997 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-48

🍁 चमक

आँखों कि चमक रोशनी

चहरे कि चमक मुश्कान

शरीर कि चमक स्फूर्ति

मन कि चमक बुध्धि 

दिल कि चमक प्यार 

व्यक्ति कि चमक व्यक्तित्व 

जिंदगी कि चमक जिंदादिली 

आत्मा कि चमक परमात्मा

खुद को चमका ओगे तो 

जीवन बनेगा महान ।

🌺 परछाई

खुश रहेना है 

खुशी को बुलाना है 

चहरे पे हसी लाना है ।

हसी खुशी दोनों  है 

सहेलीयाँ साथ निभाती है ।

जभी हसी आती है

खुसी पिछे हि खडी होती है ।

खुसी है हसी कि परछाई ।

🌻 संगम

जीवन में सही 

तरीके से जीना है

तो जीना शीखना है

शीखना तो पढना है

पढना है तो समझना है ।

समझना है तो मन,बुध्धि 

आत्मानो त्रिवेणी संगम 

में स्नान करना है ।

विनोद आनंद                              09/12/2017      फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

997 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-48

🍁 चमक

आँखों कि चमक रोशनी

चहरे कि चमक मुश्कान

शरीर कि चमक स्फूर्ति

मन कि चमक बुध्धि 

दिल कि चमक प्यार 

व्यक्ति कि चमक व्यक्तित्व 

जिंदगी कि चमक जिंदादिली 

आत्मा कि चमक परमात्मा

खुद को चमका ओगे तो 

जीवन बनेगा महान ।

🌺 परछाई

खुश रहेना है 

खुशी को बुलाना है 

चहरे पे हसी लाना है ।

हसी खुशी दोनों  है 

सहेलीयाँ साथ निभाती है ।

जभी हसी आती है

खुसी पिछे हि खडी होती है ।

खुसी है हसी कि परछाई ।

🌻 संगम

जीवन में सही 

तरीके से जीना है

तो जीना शीखना है

शीखना तो पढना है

पढना है तो समझना है ।

समझना है तो मन,बुध्धि 

आत्मानो त्रिवेणी संगम 

में स्नान करना है ।

विनोद आनंद                              09/12/2017      फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

996 Adjustment

Always Adjust with 

Everyone & Everywhere. 

Best tools of living for

Happy & Peaceful life.

But we desire that other

should  adjust with us.

Everyone desire like that.

Finally no adjustment 

with anybody any where.

We excuse & argue that 

why only we have to adjust.

We have to desire, decide

& practice this tool of living.

What is adjustment  ?

Behave according to 

the nature of other &

Any thing sacrifice for

relative & friend or any 

one is called adjustment.

Adjustment is compromise

or settlemen by better

understanding to avoid

arguments & quarrel.

Wise man always prefer 

Adjustment for better living.

Vinod Anand                           08/12/2017 Friend,Philosopher,Guide