1160 जन्म मृत्यु के फेरे

जन्म के बाद मृत्यु
मृत्यु के बाद जन्म, है
जीवन का सिलसिला ।
शरीर मरता वो मृत्यु
नया शरीर मिलता है वो
जन्म, एक नया जीवन
जन्म कर्मो, वासना अंतिम
ईच्छा के अनुसार होते है ।
स्थूल शरीर को छोडकर
सूक्ष्म शरीर मन, बुध्धि
आत्मा जाता है तब वो
कर्मो, भावनाए, संस्कार
के साथ दूसरे शरीर में
जाता है, वो पूर्व जन्म का
संस्कार कहेलाता है ।
वो हि पुराने संस्कारो के
साथ नया जीवन जीता है ।
नये जीवन में पूर्व जन्म के
कर्मो का फल भोगना है
और नये अच्चे संस्कार
और नये सत्कर्म करना है ।
जैसे कर्म करोगे एसा नया
नया पुन: जन्म मिलेगा ।
हर जन्म में संस्कारी
बनना है और सत्कर्म करके
आत्मा कल्याण करना है ।
एक जन्म एसा आयेगा कि
आप जन्म मरण के फेरों से
मुक्त हो कर ईश्र्वर के परम
धाम में निवास करोगे ।
शायद ईसको मुक्ति कहते है ।
विनोद आनंद 29/04/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1041 शादी करते वक्त क्या करना है ?

शादी करने से पहेले एक 

आदर्श व्यक्ति बनना है ।

शादी के लिए अच्छा जीवन

साथी कि तलाश करनी है ।

हमे एक अच्छा पति या पत्नि

बनने कि कोशीश करनी है ।

पति – पत्नि दोनों का धर्म और

कर्तव्य को जानना-समझना है ।

और एक दूसरे के लिए जीना है ।

हमे एक आदर्श पति या पत्नि

कि तलाश नही करनी है हमे

आदर्श पति या पत्नि बनना है ।

यह जानना जरूरी है के शादी

सिर्फ दो शरीर का मिल नही 

दो आत्माओ का मिलन है ।

शादी से सिर्फ पति पत्नि का

रिश्ता नही बनता दो परिवार

रिश्तों के बंधन में जूड जाते है

सभी रिश्तों को भी निभा कर

सभी रिश्तों को साथ ही जीना है ।

पति पत्नि दोनों को खुस रहेना है,

परिवार के सभ्यों को खुश रखना है ।

हमे शादी के बाद कैसे जीना है वो 

सोच कर सफल दाम्पत्य जीवन 

का आयोजन करना है । जो सोच 

समझकर जीएगा, वो होगा सफल ।

विनोद आनंद                                     18/01/2018        फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड 

997 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-48

🍁 चमक

आँखों कि चमक रोशनी

चहरे कि चमक मुश्कान

शरीर कि चमक स्फूर्ति

मन कि चमक बुध्धि 

दिल कि चमक प्यार 

व्यक्ति कि चमक व्यक्तित्व 

जिंदगी कि चमक जिंदादिली 

आत्मा कि चमक परमात्मा

खुद को चमका ओगे तो 

जीवन बनेगा महान ।

🌺 परछाई

खुश रहेना है 

खुशी को बुलाना है 

चहरे पे हसी लाना है ।

हसी खुशी दोनों  है 

सहेलीयाँ साथ निभाती है ।

जभी हसी आती है

खुसी पिछे हि खडी होती है ।

खुसी है हसी कि परछाई ।

🌻 संगम

जीवन में सही 

तरीके से जीना है

तो जीना शीखना है

शीखना तो पढना है

पढना है तो समझना है ।

समझना है तो मन,बुध्धि 

आत्मानो त्रिवेणी संगम 

में स्नान करना है ।

विनोद आनंद                              09/12/2017      फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

943 जागो और जगाओ

जगाने के लिए पहले

खूद जागना जरूरी है

ईसलिए जागो और 

दूसरों को जगाओ ।

पहेले आत्मको जगाना है

मतलब आत्मको जानना है  

और समजना है कि हम

शरीर नहीं आत्मा है ।

फिर उस कि शक्ति को

जानना है,  समजना है और 

आत्मविश्र्वास जगाना है ।

बाद में आत्मा के गुणों को

जानना है समजना है और

जगा के आत्मसाद करना है ।

फिर हमें कम, क्रोध, लोभ, मोह, 

मद और मत्सर को भगाना है ।

मोज शोख और एसो आराम

कि गहेरी निंद से जागना है ।

लक्ष्यहीन जिंदगी को जगाना है

और सद् विचारो को जगाना है ।

जीवन में सतत जागृत रहेना है

और दूसरों को भी जगाना है ।

जीवन को महान, अमर और

अदभूत बनाना है ईसलिए

जागो और दूसरों को जगाओ ।

विनोद आनंद                               06/10/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

869 पढाई पारसमणी

पढो और आगे बढो, 

बढो और विकास करो ।

पढाई बीना नहीं उध्धार

और नहीं विकास ।

पढाई ज्ञान बढाए, 

ज्ञान सद् बुध्धि बढाए ।

सद् बुध्धि संस्कार बढाए

और मन को करे शिक्षित ।

शिक्षित मन सज्जन बनाए ।

सज्जन स्वर्ग बनाए ।

पढाई पूजा सरस्वती देवी की

और सेवा देश की, उध्धार 

आत्मा का,और निर्वाह जीवन का ।

पढाई बनाए पंडीत कहते है

राजा पूजयते देश में, 

पंडीत सर्वत्र पूजयते ।

पढाई पद और पैसा दिलाए 

ईसलिए पढाई सोने का अंडा 

देनेवाली मुरघी ।

पढाई जीवन का आधार, 

जीवन निर्वाह और निर्माण 

का साधन और जीवन साधना ।

पढाई पारसमणी, स्पर्स से

जीवन को बनाए सोना और

सुख शांति का धाम ।

विनोद आनंद                                06/08/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

860 द्रष्टि और सृष्टि

जैसी द्रष्टि एसी सृष्टि

जैसी सोच एसी द्रष्टि ।

जब आँखे देखती है 

तब मन सोचता है

सोच द्रष्टि कि जननी है ।

गलत सोच गलत द्रष्टि

गलत द्रष्टि गलत सृष्टि ।

सही सोच सही द्रष्टि

सही द्रष्टि सही सृष्टि ।

सकरात्मक सोच सहि द्रष्टि  

सद् बुध्धि सकरात्मक सोच ।

ज्ञान से बनती है सद् बुध्धि ।

सृष्टि सही या गलत ?  

द्रष्टि करेगा फैसला ।

आँखे सिर्फ देखती है

मन द्रष्टि देता है और

हम आत्मा, आत्मशक्ति 

मन में सही सोच जगए ।
सब सही, अच्छा और 

सुंदर  नज़र आता है ।

विनोद आनंद                                28/07/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

 

846 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-36

💖 व्यक्तित्व और सद् गुण

जैसे फूलो में  खूशबु है 

फलों में  मीठास है ।

एसे व्यक्ति में व्यक्तित्व हो

तो उस कि खूशबु  फैलती है ।

उसके सद् गुणो कि मीठास से

सब का जीवन बनता है मीठा ।

🍁 वाणी व्यवहार और वर्तन

वाणी हो मधुर, 

व्यवहार हो अच्छा

और वर्तन हो सही

तीनों का हो त्रिवेणी संगम 

तो जीवन बने तीर्थ ।

💞 त्रिवेणी संगम 

मन हो संयमी और पवित्र, 

बुध्धि हो विवेकि और शुध्ध, 

आत्मा हो जागृत और संस्कारी, 

तीनों का हो त्रिवेणी संगम 

तो मानव जन्म हो जाए सफल

जीवन बने महान ने यादगार ।

💟 ठूठते है 

हम ठूठते  है, 

सुख में दु:ख, 

दु:ख में ठूठो सुख ।

हम ठूठते  है, 

गैरों में अपनो को, 

अपनो कों भूल कर ।

हम ठूठते  है, 

मान में अपमान को, 

अपमान में ठूठो मान को ।

विनोद आनंद                                12/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड