2106 ध्यान समाधि और साधना

ध्यान एक बहेतरीन साधना ।
ध्यान एक भीतर कि यात्रा ।
जीवन परिवर्तन कि प्रक्रिया ।
ध्यान कि भूमिका है शुध्ध
और स्थिर अतः करण ।
ध्यान आत्मा का परमात्मा
तादतम्य पाने का, मन पर
नियंत्रण,एकाग्रता, आत्मा
का उध्धार और शांति पाने
उत्तम प्रयास है ।
जैसे साकार जळ रूप हो
एसे ध्यान से मन आत्मा
में विलीन हो जाता है तब
वो समाधि बन जाती है ।
ध्यान का लक्ष्य है समाधि ।
निर्विचार ध्यान साधना का
परम लक्ष्य होता है ।
निर्विचार ध्यान मन और
आत्मा कि एकता है समाधि ।
समाधि ध्यान कि परम
अंतिम अवस्था है, जिस में
आत्मा बह्मरूप बनता है ।
विनोद आनंद 19/07/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

2045 आध्यात्मिक और व्यवहारीक जीवन

आध्यात्मिक जीवन और
व्यवहारीक जीवन अलग
नहि है वो दोनों एक हि है ।
सोचो आध्यात्मिक जीवन,
व्यवहारी जीवन बीना कैसा
होगा और व्यवहारी जीवन,
आध्यात्मिक जीवन बीना
कैसा होगा । दोनों जीवन
अभिन्न जीवन है ।
तुम्हारा व्यवहारी जीवन
का आधार आध्यात्मिक
जीवन होना चाहिए ।
शरीर पर केन्द्रित, काम
क्रोध, लोभ,मोह, मद, मत्सर
और स्वार्थ युक्त व्यवहारी
जीवन जीते हो तो वो जीवन
सफल नहि होता है ।
आत्मा पर केन्द्रित सत्य, प्रेम,
दया, करूणा और भक्ति युक्त
व्यवहारी जीवन जीते हो तो
सफल जीवन होता है ।
व्यवहारी जीवन में कुशलता
और आध्यात्मिक जीवन में
ईश्र्वर में श्रध्धा,विश्र्वास और
भक्ति अनमोल जीवन जीने
का सहि तरिका है ।
आध्यात्मिकता बीना जीवन
मानव जीवन नहि शैतान या
जानवर जीवन भाँति है ।
विनोद आनंद 03/06/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1947 जागरण के तीन सूत्र

समस्त जीवन के सार को
उपलब्ध करने का एक हि
विज्ञान है वो है अपने भीतर
में जागरण को या होश को
तीन सूत्रों से उपलब्ध करे ।
पहेला सूत्र हमारी चारों
ओर जगत है उस के प्रति
जागृत रहेना है, लेकिन
हम सोये है, बेहोश है ।
हमने जगत कि हर चीज
को जागृतता से देखी नहि,
चलते जाते है, जीते जाते है
क्रिया करते है लेकिन चित
क्रिया के साथ नहि, कहि
ओर है, हम जागृत नहि ।
हमे क्रिया और चित को एक
करने का अभ्यास करना है ।
चित का क्रिया से विवाह हि
जगत के प्रति जागरण है ।
उस के बाद दूसरा सूत्र,मन के
प्रति जागरण का अभ्यास ।
मन में क्या चल रहा है, हम
बहार कि क्रिया में फसे है
कि मन के प्रति हम जागृत
नहि है, दो क्षण बैठ के देखे
कि मन में क्या चल रहा है ।
उस पर नजर रखे उस कि
गतिविधियों प्रति जागृत हो
कर उस को नियंत्रीत करे ।
तीसरा सूत्र,आत्मा के प्रति
जागरण का अभ्यास करना ।
हम शरीर के प्रति जागृत है,
मगर आत्मा के प्रति नहि ।
शरीर सिर्फ साधन है ।
आत्म के गुणों का आत्मसात
करना है । जगत, मन, आत्मा
प्रति जागरण हि जीवन कि
सबसे बडी उपलब्धी है ।
विनोद आनंद 27/03/2020
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1849 समझो और जानो

जिंदगी को जीना है, तो उस
कि किंमत, हेमीयत समझो ।
जिंदगी को जीतना है तो उस
का रहस्य और उद्देश जानो ।
समझने से और जानने से
जिंदगी बनेगी आसान ।
जिंदगी से कोई भी चीज़
ज्यादा किंमती नहि है जिसे
जिंदगी से कुछ पा शकते हो ।
जिंदगी साधना है तुम साधन ।
जिंदगी कि हेमीयत सब से
ज्यादा है, ज्यादा हि समझना,
जिंदगी है तो जहाँन है ।
जिंदगी आसानी से नहि मीली,
लख चौरेसी जन्म-मरण के फेरे
के बाद यह जिंदगी मिली है ।
अच्छे कर्मो से नई जिंदगी का
निर्माण करना है वरना मानव
जन्म नहि मिलेगा दूबारा यहि
रहस्य है जिंदगी का ।
सभी प्राणीयों में मानव श्रेष्ठ
क्यूँ कि उसे पास मन बुध्धि
आत्म शक्ति और कार्य शक्ति है ।
उस के सहि उपयोग से श्रेष्ठ
बनने का उद्देश है जिंदगी का ।
जिंदगी जानो और समझो तो
सफल, समृध्ध, महान बनेगी ।
विनोद आनंद 06/01/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड