821💐शेर शायरीयों का गुलदस्ता-34

💛 यकीन नही होता

सोच ने से नही थकाता

लिखते लिखते नही थकाता

कहते कहते नही थकता लेकिन 

यह सुनते सुनते थक गया कि

कुछ नही होगा,कोई नही सुधरेंगे 

सब अपनी अपनी मस्ती में  है 

कोई नही सुनता किसी कि ।

यकीन नही होता कि ज्ञान 

ईतना बेअसर हो गया है कि

लोग बेअसर हो गए है ।

💙 बात बनेगी 

जब कोई बात बीगड जाए

सभाँल ना होगा खुदको 

फिर बात को एसे कि 

बात ओर न बीगडे 

तो ही बात बनेगी वरना 

बात ओर बगडती जाएगी ।

💚 निकाल दो तो

पथ्थर से बीन जरूरी निकाल दो 

तो भगवान कि मूरत बनती है ।

अगर पथ्थर दिल ईन्सान से

बीन जरूरी दुर्गुण निकाल दो

तो एक आर्दश ईन्सान बनता है ।

विनोद आनंद                                22/06/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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800 ईन्सान क्या नही करता-2

ईन्सान क्या नही करता ? 

समय कि कदर नही करता 

क्या जल्दी है ? बहुत समय बाकी है

कल करगें एक दिन में क्या हो जाएगा

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

ईन्सान क्या नही करता ? 

दूसरों मे अच्छाई नही देखता

बूराई देखता है, बूरा बनता है

खुद कि बूराई नही देखता

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

ईन्सान क्या नही करता ? 

सच नही बोलता,

अपने फायदे के लिए

जूठ से सच छूपाता है ।

सच बोलने से डरता है ।

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

ईन्सान क्या नही करता ? 

विश्र्वसा नही करता

धोखेसे डरता है ।

विश्र्वास दिला कर

विश्र्वासघात करता है ।

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

विनोद आनंद                                 04/06/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

799 ईन्सान क्या नही करता-1

ईन्सान क्या नही करता ? 

अपनी गलती कबूल नही करता ।

दूसरों को जिम्मेदार समजता है ।

उसने गुस्सा किया, बात बढ गई 

उस में मेरी को गलती नही है ।

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

ईन्सान क्या नही करता ? 

किसी कि गलती माफ नही करता ।

गलती कि है तो सज़ा मिलेगी ।

जब खुद गलती करे तो सरिफ, 

दूसरें करे तो गुन्हेगार ।

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

ईन्सान क्या नही करता ? 

अपनी गलती कि माफि नही मागता ।

मैं  क्यूँ माफि मांगु ? 

मैं मेरी कमाई से पेट भरता हूँ, 

उसकि कमाई का नही खाता ।

अपना इगो बनाए रखता है ।

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

ईन्सान क्या नही करता ? 

अपनी किसी से प्यार नही करता

प्यार घाटे का सौदा है 

जिंदगी में  मुनाफा चाहीए

प्यारे पेट नही भरता तो

जिंदगी बसर कैसे होगी 

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

विनोद आनंद                                 04/06/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

769 अभिनय

ईन्सान अभिमान का पूतला, 

ईन्द्रियो के विषयो का भोगी ।

वासना-कामना का कामदेव ।

ईन्सान दंभ का दानव, 

बूरे स्वभाव-आदतों का गुलाम

लोभ लालच का शिकार ।

ईन्सान पैसा का पूजारी, 

छल कपट में माहिर 

मोह-ममता के नसे में 

दुर्गुणो-गुनाहों का देवता ।

इन्सान सब अभिनय करता है

ईन्सान का अभिनय नही करता ।

कोई गुरू या ईश्वर कृपा से

ईन्सानियत का पाठ शीख के

ईन्सान का अभिनय कर शकता है 

दुर्गुणो-दुराचार करता है

सद् गुणो-सद् आचरण नही 

करता ईसलिए ईन्सान का

अभिनय नही कर शकता ।

ईन्सान बस ईन्सान बने तो

जीवन सार्थक हो जाएगा ।                                    विनोद आनंद                                  09/05/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

700 स्वर्ग नर्क

पेड पौधें से हराभरा है जहाँ 

फूले सजाते है महेकाते है जहाँ को

पक्षीयों कि कलबल गीत  है जहाँ का

हवाँ के झोंखे नचाते है उन्हे जहाँ में

पर्वते और नदीयाँ से सुंदर है जहाँ ।

चाँद सूरज, तारे श्रींगार है जहाँ का

सभी किसी भी तरह सजाते है 

सवाँरते है ईस जहाँ  को ।

लेकिन ईन्सान क्या करता है, 

ईस जहाँ  को स्वर्ग बनाने को ? 

हवा पाणी को प्रदूषीत करता है,

वृक्षो को काटता है और 

खेतों को बेचता है प्रकृति का

समतुलन बिगाड देता है,और

सब में मिलावट करता है, 

ईन्सान अपने स्वार्थ के लिए ।

ईन्सान परिवार और समाज से

तालमेल  नही रखता,संस्कार 

या संस्कृति भी छोड दी है, 

अपने स्वार्थ के लिए ।

खुबसुरत जहाँ को बदसुरत

बनाने लगा है, स्वर्ग जैसे जहाँ को

नर्क समान बनाने को तुला है, 

अपने स्वार्थ के लिए । 

जब ईन्सान, ईन्सान बने, 

साथ सहयोग और सेवासे

सब के साथ प्रेम से रहे

और प्रकृति के साथ रहे ।

तब यह खुबसुरत जहाँ को 

स्वर्ग बनने कि देर नही लगेगी ।

जहाँ को स्वर्ग बनना हि 

लक्ष्य होना है जिंदगी का और

जिम्मेदारी है ईन्सान कि 

लक्ष्य को प्राप्त करने कि ।

विनोद आंनद                          17/03/2017     फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

ईन्सान एक फूल

​बगीयाँ मे कई रंग बेरंगी फूल

खुसबू फैला कर हर पल 

माहोल को सँवारते

और महेकाते रहते है ।

फूलों के हम ऋणि है ।

उन का शूक्रिया करना है । 

कुदरत का सबसे बडा,सर्व श्रेष्ठ,

खुबसूरत और खुसबूदार फूल 

दुनिया कि बगीयाँ में है ईन्सान ।

ईन्सान संसार के वृक्ष पे,

संस्कार कि डाली पे खिला फूल है ।

हमें कुदरत का शूक्रिया करना है ।

सद् गुणो,सद् विचार,सद् भाव कि 

रंग बेरंगी पंखडीयों से खिला फूल, 

दुनिया को सँवारता है और 

ईन्सानीयत,सद् आचरण कि 

खुशबू से महेकाता है माहोल । 

एसे फूल को कोई भी अपनी

जिंदगी की फूलदानी में सजाएगा

और उस कि सुंदरता और खुशबू से

खुदको सँवारेगा और महेकाएगा ।

विनोद आनंद                          14/01/2017         फ्रेन्ड, फिलोसोफर,गाईड 

पहेले और अब 

​कहाँ गई है शर्म जो 

पहेले आँखो मे रहती थी ।

अब बेशर्मी है ।

कहाँ गई है दया जो

पहेले दिल में रहती थी ।

अब क्रूरता है ।

कहाँ गई है मासुमीयत जो

पहेले चहेरे पे रहती थी ।

अब गुरूर है ।

कहाँ गई है मीठास जो

पहेले जूबा में रहती थी ।

अब कटूता है ।

कहाँ गया है प्रेम जो

पहेले मन में रहेता था ।

अब मोह है ।

कहाँ गया है ईमान जो

पहेले ईन्सानो में  था ।

अब बेईमानी है ।

कहाँ गया है वो रिश्ते जो

परिवार में फले फूलते थे 

अब रिश्ते नाम के है ।

जो अब है, वो ईन्सान नही ।

जो पहेले था, वो ईन्सान था ।

पहेले जो था उसे लौटना होगा ।

ईन्सान का गौरव निभाना होगा ।

विनोद आनंद                         11/10/2016           फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड