1885 जिंदगी है एक स्वप्ना

जिंदगी है एक स्वप्ना,
स्वप्ना क्या है जिंदगी का ?
जिंदगी का स्वप्ना है कि
तुम सफल ईन्सान बनो,
महान बनो और मरने के
बाद भी जिंदा रहो ।
जिंदगी का स्वप्ना तुम्हे
साकर करना है तो तुम्हे
देखना है कई बडे स्वप्ने ।
पहेला स्वप्ना देखना है
ईन्सान बनने का, मतलब
चारित्र घडतर या व्यक्तित्व
विकासका करना है संकल्प ।
दूसरा स्वप्न देखना है महान
बनने का, मतलब नीति, नियम,
सिध्धांतों से नैतिकता से जीने
का करना है संकल्प ।
तीसरा स्वप्ना देखना है, मरने
के बाद जिंदा रहने का, मतलब
समाज के लिए कुछ करने का
करना है संकल्प ।
संकल्प से सिध्धि मिलती है,
द्दढ निर्णय से, पाक ईरादों से
और परिश्रम से जिंदगी एक
स्वप्ना नहि रहेगी, जिंदगी एक
बन जाएगी एक हकिकत ।
विनोद आनंद 06/02/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1871 मतलबी ईन्सान कि परख

मतलब निकल गया तो पहचानते
नहि,मतलब कि दुनिया सारी यहाँ
कोई किसी का यार नहि ।
मतलबी न बनो, मतलबी को परखो ।
बातचीत,व्यवाहार,गतिविधियोंसे
उसे परखो और बचो या दूर रहो ।
कुछ निशानीयाँ से आप परखो
और सावधान हो जाओ ।
* जो कहते है वो करते नहि
* उसे जरूरत है तो हि वो
आप के साथ होते है ।
* वादें करते है, निभाते नहि
* जुठ्ठ बोलते है, स्वार्थी है
* खुद हि प्लान बनाते है और
बहाना बना के रद करते है ।
* जब आप को उन कि जरूरत
है तो वो पलायन हो जाते है ।
* दूसरों को खुश करने का ढोंग
या दिखावा करता है ।
* वो चाहते है कि सब उस कि
तारिफ करे सब कि नजरों में
बने रहे, सब उन को ध्यान दे ।
* उन के जीवन में किसी के लिए
कोई जगह नहि होती और वो
किसी के कुछ काम के नहि है ।
* वो रिश्ते का ईस्तमाल करते है
अपने फायदे के लिए ।
* रिश्ते कि कोई हेमीयत नहि होती
रिश्ते टूटना है तो टूट जाए ।
मतलबी आप के परिवार में या दोस्तो
में या ओफिस में मिलेगे । परखो, जानो
और बचो उस पर कभी विश्र्वास न करो ।
विनोद आनंद 25/01/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1825 समझदार कौन -2

समझदार ईन्सान कौन ?
समझदार है, वो हि ईन्सान
कहेलाता है । समझदार…..
* मौन बैठता है जब तक पूछा
नहि जाय, तब तक बोलता नहि ।
* कोई भी ईच्छा पूर्ण न होने से
परेशान नहि होता या बरबाद
होने से दुःखी नहि होता,कोई
भी परिस्थिति में धीरज रखता है ।
* सोच समझकर काम करता है
जब तक काम पूरा नहि होता
तब तक दूसरा काम नहि लेता ।
* अपने से ज्यादा होशियार कि
बातों को ध्यान से सुनता है,
कम होशियार लोगों कि बातों
को अनसुना करता है । बातें
सुनते वक्त बहेस नहि करता ।
* कितनी भी बेईज्जती या तारिफ
करो तो भी कोई फरक नहि पडता ।
* ज्ञान बढाता, शीखता रहेता है उस
का ईस्तमाल भलाई के लिए करता है ।
* अपने विषय कि गहेरी जानकारी
हो,उस का पृथ्थकरण कर शकता
हो,दूसरों को समझा शकते हो ।
* शास्त्रो का अभ्यासी हो, सहि और
गलत कि समझ हो और शास्त्रो के
अनुसार सहि हो वो हि करता हो ।
* ज्यादा पैसा, शक्ति, मान सन्मान
बुध्धिवान हो तो भी घमंडी न हो ।
यह सब जीवन में आत्मासात करोगे
तो समझदार ईन्सान बनोगे ।
विनोद आनंद 15/12/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1824 समझदार ईन्सान कौन-1

समझदार ईन्सान कौन ?
समझदार है, वो हि ईन्सान
कहेलाता है । नासमझ को
नादान, मूर्ख को मूर्ख और
बेवकूफ को बेवकूफ कहते है
ईन्सान नहि कहते ।
* समझदार आत्म ज्ञानी होता है
सहि काम निष्काम भाव से
करता है ।
* सहि काम कि ईच्छा रखता है,
गलत काम कि नहि । आस्तिक
होता है, काम श्रध्धासे करता है ।
* कोई भी काम गुस्से कि, खुशी कि,
ईगो कि वज़ह से नहि करता है ।
* वो अपना प्लान और काम दूसरों
को पूरा होने के बाद बताता है ।
* मुश्केलियों में भी काम पूरा करता है ।
* दुनियादारी, धर्म कार्य के साथ पैसा
कमाने का काम भी कर लेता है ।
* काबिलीयत अनुसार काम पसंद
करता है, काबीलीयत से करता है ।
* किसी से अपेक्षा नहि रखता, किसी
का अपमान नहि करता ।
* ध्यान से सुनता है, समझ जाता है ।
यह सब जीवन में आत्मासात करोगे
तो समझदार ईन्सान बनोगे ।
विनोद आनंद 15/12/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1766 प्रभाव से प्रभावित

अपने प्रभाव से दूसरों को
प्रभावित कैसे करोगे ?
अपने प्रभाव से दूसरों
प्रभावित करना एक कला है ।
* ईन्सान के चारित्र का
प्रभाव हि दूसरे ईन्सान
को प्रभावित कर शकता है,
दिखावा या आडंबर से नहि ।
* दूसरों को शांति से सुनो और
समजो तो वो आप को पसंद
करेंगे और प्रभावित भी होंगे ।
* अच्छे काम कि प्रसंशा करो,
लेकिन चापलुशी नहि तो वो
आपसे प्रभावित जरूर होंगे ।
* किसे मिले तो खुश होकर
मुस्काराकर मिले तो वो
आप से वो प्रभावित होंगे ।
* आप बात करे तो डरकर
नहि, लेकिन आत्मविश्रवास
से खुल कर बात करे तो वो
आप से प्रभावित होंगे ।
* आप जब किसी से मिले तो
देने कि या उस के फायदे कि
बात करे तो वो प्रभावित होंगे ।
यह बातों का अभ्यास करोंगे तो,
किसी को भी प्रभावित कर शकोगे ।
विनोद आनंद 24/10/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1728 संघर्ष

प्राणी मात्र के जिवन में
जीने के लिए संघर्ष है ।
संघर्ष बीना जिवन नहि ।
जिवन निर्वाह के लिए पैसा
कमाने के लिए संघर्ष है ।
संघर्ष हि कडी महेनत है ।
संघर्ष हि प्रारब्ध बनता है ।
नारी और बेबी प्रसृति में
पीडाजनक संघर्ष करते है ।
संघर्ष का परिणाम कुछ
प्राप्ति या सफलता हि है ।
मानव आबरू ईज्जत के
लिए संघर्ष करता रहेता है ।
न किया तो बेईज्जत होगा ।
हर कोई प्राणी जिवन में प्रेम,
लाड दूलार और सुरक्षा के
लिए संघर्ष करता रहेता है ।
संघर्ष से सिध्धि मिलती है ।
संघर्ष से न गभराना, संघर्ष
जिवन जीने का जरीया है ।
जो जीने के लिए, प्रेम के लिए
और आबरू के लिए संघर्ष
करता रहेता है, वो हि आदर्श
ईन्सान बन शकता है, वरना
वो किसी प्राणी से कम नहि ।
विनोद आनंद 14/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1696 मजबूरी

मजबूरी सब से बडी
गुलामी है । मजबूरी
आदमी को ईच्छा न
होने पर भी काम करने
को मजबूर करती है ।
मजबूरी ।
मजबूरी ईन्सान कि
खराब परिस्थिति हि
उस कि कमजोरी है ।
मजबूर आदभी को कोई
ओपसन नहि होता है ।
लोग मजबूरी का गलत
फायदा उठाते है ।
गलत या खराब वक्त में
ईन्सान को मायुस नहि
होना है लेकिन धीरज से
हिंमत से परिस्थितियों
का सामना करना है या
उसे बदल ने का प्रयास
करना है या बदल नहि
शकते तो समजदारी से
उसका स्वीकार करना है ।
निराश नहि होना है हर
वक्त होसला बनाए रखना है
और अच्छे वक्त कि उमीद
रखकर प्रयास करना है ।
किसी कि भी मजबूरी का
गलत फायदा नहि उठाना
लेकिन उन्हे सपोर्ट करना
और उस का साथ देना में
हि ईन्सानीयत है
मजबूरीयाँ हि इन्सान कि
क्षमता कि परीक्षा है ।
मजबूरीयाँ ईन्सान को
मजबूत बनाती है ।
विनोद आनंद 15/08/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड