1167 ईन्सान का चहेरा

हसाता खिलता चमकता और जो
निर्भय है वो चहेरा है ईन्सान का ।
मगर एसा चहेरा नज़र नही आता
ईन्सान का चहेरा खामोश, भयभीत
निर्भयता नजर आती है । क्या
मजबूरी है ? कि चहेरे पे हसी
और चमक गायब हो गई है ।
जो अंतः करण में है वो चहेरे
प्रगट हो जाएगा मन कमजोर
और भयभीत हो तो चहेरे पे हसी
कहाँ से आएगी , मन प्रसन्न
और खुश है तो चहेरे हसेगा ।
मन अशुध्ध और मेला है तो
चहेरे पे चमक कहाँ से आएगी ।
मन शुध्ध और पवित्र है तो
चहेरा चमकेगा और चमता रहेगा ।
विचार अच्छे है कर्म अच्छे है तो
चहेरे पे निर्भयता आएगी ।
चहेरे पे हसी, चमक निर्भयता के
लिए चित्त निर्मल,मन पवित्र, बुध्धि
शुध्ध, कर्म अच्छे होना जरूरी है ।
विनोदआनंद 05/05/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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971 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-46

🌻 क्यूँ ? 

दिलने फिर याद किया 

फिर फरीयाद किया कि

वादा करके न निभाया 

वादा करते है मगर निभाते नही, 

प्यार करते है मगर जताते नहीं  ।

तो फिर याद क्यूँ करना ? 

🌹 नज़रिया

जिंदगी बहुत खुबसूरत है 

लेकिन जिंदगी को देखने का 

नजरीया खुबसूरत हो तो ।

अगर नजरिया बदसूरत है

तो जिंदगी कैसे लगेगी खुबसूरत ।

🌺 उसे क्या कहेना  ?

ईन्सान वो जो दुश्मन से भी 

महेरबान हो उसे क्या कहेना ।

ईन्सान वो जो गैरों को भी

अपना बनाले उसे क्या कहेना  ?

उसे अच्छा ईन्सान कहते है ।

ईन्सान वो जो दोस्त से 

दुश्मनी करे,उसे क्या कहेना  ?

ईन्सान वो जो अपनो से भी

दुश्मनी करे,उसे क्या कहेना ?

उसे बुरा ईन्सान कहते है ।

विनोद आनंद                               16/11/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

821💐शेर शायरीयों का गुलदस्ता-34

💛 यकीन नही होता

सोच ने से नही थकाता

लिखते लिखते नही थकाता

कहते कहते नही थकता लेकिन 

यह सुनते सुनते थक गया कि

कुछ नही होगा,कोई नही सुधरेंगे 

सब अपनी अपनी मस्ती में  है 

कोई नही सुनता किसी कि ।

यकीन नही होता कि ज्ञान 

ईतना बेअसर हो गया है कि

लोग बेअसर हो गए है ।

💙 बात बनेगी 

जब कोई बात बीगड जाए

सभाँल ना होगा खुदको 

फिर बात को एसे कि 

बात ओर न बीगडे 

तो ही बात बनेगी वरना 

बात ओर बगडती जाएगी ।

💚 निकाल दो तो

पथ्थर से बीन जरूरी निकाल दो 

तो भगवान कि मूरत बनती है ।

अगर पथ्थर दिल ईन्सान से

बीन जरूरी दुर्गुण निकाल दो

तो एक आर्दश ईन्सान बनता है ।

विनोद आनंद                                22/06/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

800 ईन्सान क्या नही करता-2

ईन्सान क्या नही करता ? 

समय कि कदर नही करता 

क्या जल्दी है ? बहुत समय बाकी है

कल करगें एक दिन में क्या हो जाएगा

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

ईन्सान क्या नही करता ? 

दूसरों मे अच्छाई नही देखता

बूराई देखता है, बूरा बनता है

खुद कि बूराई नही देखता

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

ईन्सान क्या नही करता ? 

सच नही बोलता,

अपने फायदे के लिए

जूठ से सच छूपाता है ।

सच बोलने से डरता है ।

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

ईन्सान क्या नही करता ? 

विश्र्वसा नही करता

धोखेसे डरता है ।

विश्र्वास दिला कर

विश्र्वासघात करता है ।

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

विनोद आनंद                                 04/06/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

799 ईन्सान क्या नही करता-1

ईन्सान क्या नही करता ? 

अपनी गलती कबूल नही करता ।

दूसरों को जिम्मेदार समजता है ।

उसने गुस्सा किया, बात बढ गई 

उस में मेरी को गलती नही है ।

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

ईन्सान क्या नही करता ? 

किसी कि गलती माफ नही करता ।

गलती कि है तो सज़ा मिलेगी ।

जब खुद गलती करे तो सरिफ, 

दूसरें करे तो गुन्हेगार ।

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

ईन्सान क्या नही करता ? 

अपनी गलती कि माफि नही मागता ।

मैं  क्यूँ माफि मांगु ? 

मैं मेरी कमाई से पेट भरता हूँ, 

उसकि कमाई का नही खाता ।

अपना इगो बनाए रखता है ।

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

ईन्सान क्या नही करता ? 

अपनी किसी से प्यार नही करता

प्यार घाटे का सौदा है 

जिंदगी में  मुनाफा चाहीए

प्यारे पेट नही भरता तो

जिंदगी बसर कैसे होगी 

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

विनोद आनंद                                 04/06/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

769 अभिनय

ईन्सान अभिमान का पूतला, 

ईन्द्रियो के विषयो का भोगी ।

वासना-कामना का कामदेव ।

ईन्सान दंभ का दानव, 

बूरे स्वभाव-आदतों का गुलाम

लोभ लालच का शिकार ।

ईन्सान पैसा का पूजारी, 

छल कपट में माहिर 

मोह-ममता के नसे में 

दुर्गुणो-गुनाहों का देवता ।

इन्सान सब अभिनय करता है

ईन्सान का अभिनय नही करता ।

कोई गुरू या ईश्वर कृपा से

ईन्सानियत का पाठ शीख के

ईन्सान का अभिनय कर शकता है 

दुर्गुणो-दुराचार करता है

सद् गुणो-सद् आचरण नही 

करता ईसलिए ईन्सान का

अभिनय नही कर शकता ।

ईन्सान बस ईन्सान बने तो

जीवन सार्थक हो जाएगा ।                                    विनोद आनंद                                  09/05/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

700 स्वर्ग नर्क

पेड पौधें से हराभरा है जहाँ 

फूले सजाते है महेकाते है जहाँ को

पक्षीयों कि कलबल गीत  है जहाँ का

हवाँ के झोंखे नचाते है उन्हे जहाँ में

पर्वते और नदीयाँ से सुंदर है जहाँ ।

चाँद सूरज, तारे श्रींगार है जहाँ का

सभी किसी भी तरह सजाते है 

सवाँरते है ईस जहाँ  को ।

लेकिन ईन्सान क्या करता है, 

ईस जहाँ  को स्वर्ग बनाने को ? 

हवा पाणी को प्रदूषीत करता है,

वृक्षो को काटता है और 

खेतों को बेचता है प्रकृति का

समतुलन बिगाड देता है,और

सब में मिलावट करता है, 

ईन्सान अपने स्वार्थ के लिए ।

ईन्सान परिवार और समाज से

तालमेल  नही रखता,संस्कार 

या संस्कृति भी छोड दी है, 

अपने स्वार्थ के लिए ।

खुबसुरत जहाँ को बदसुरत

बनाने लगा है, स्वर्ग जैसे जहाँ को

नर्क समान बनाने को तुला है, 

अपने स्वार्थ के लिए । 

जब ईन्सान, ईन्सान बने, 

साथ सहयोग और सेवासे

सब के साथ प्रेम से रहे

और प्रकृति के साथ रहे ।

तब यह खुबसुरत जहाँ को 

स्वर्ग बनने कि देर नही लगेगी ।

जहाँ को स्वर्ग बनना हि 

लक्ष्य होना है जिंदगी का और

जिम्मेदारी है ईन्सान कि 

लक्ष्य को प्राप्त करने कि ।

विनोद आंनद                          17/03/2017     फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड