1728 संघर्ष

प्राणी मात्र के जिवन में
जीने के लिए संघर्ष है ।
संघर्ष बीना जिवन नहि ।
जिवन निर्वाह के लिए पैसा
कमाने के लिए संघर्ष है ।
संघर्ष हि कडी महेनत है ।
संघर्ष हि प्रारब्ध बनता है ।
नारी और बेबी प्रसृति में
पीडाजनक संघर्ष करते है ।
संघर्ष का परिणाम कुछ
प्राप्ति या सफलता हि है ।
मानव आबरू ईज्जत के
लिए संघर्ष करता रहेता है ।
न किया तो बेईज्जत होगा ।
हर कोई प्राणी जिवन में प्रेम,
लाड दूलार और सुरक्षा के
लिए संघर्ष करता रहेता है ।
संघर्ष से सिध्धि मिलती है ।
संघर्ष से न गभराना, संघर्ष
जिवन जीने का जरीया है ।
जो जीने के लिए, प्रेम के लिए
और आबरू के लिए संघर्ष
करता रहेता है, वो हि आदर्श
ईन्सान बन शकता है, वरना
वो किसी प्राणी से कम नहि ।
विनोद आनंद 14/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1696 मजबूरी

मजबूरी सब से बडी
गुलामी है । मजबूरी
आदमी को ईच्छा न
होने पर भी काम करने
को मजबूर करती है ।
मजबूरी ।
मजबूरी ईन्सान कि
खराब परिस्थिति हि
उस कि कमजोरी है ।
मजबूर आदभी को कोई
ओपसन नहि होता है ।
लोग मजबूरी का गलत
फायदा उठाते है ।
गलत या खराब वक्त में
ईन्सान को मायुस नहि
होना है लेकिन धीरज से
हिंमत से परिस्थितियों
का सामना करना है या
उसे बदल ने का प्रयास
करना है या बदल नहि
शकते तो समजदारी से
उसका स्वीकार करना है ।
निराश नहि होना है हर
वक्त होसला बनाए रखना है
और अच्छे वक्त कि उमीद
रखकर प्रयास करना है ।
किसी कि भी मजबूरी का
गलत फायदा नहि उठाना
लेकिन उन्हे सपोर्ट करना
और उस का साथ देना में
हि ईन्सानीयत है
मजबूरीयाँ हि इन्सान कि
क्षमता कि परीक्षा है ।
मजबूरीयाँ ईन्सान को
मजबूत बनाती है ।
विनोद आनंद 15/08/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1692 कही सुनी बातें

* अच्छे वक्त के लिए बूरे वक्त
का सामना करना पडता है ।
बुरे वक्त में शांत रहे और
अच्छे वक्त में समतुलीत रहे ।
* जिंदगी में कभी किसी को
बेकार मत समजना क्यूँ कि
बंध घडी भी दिन में दो बार
सहि समय बताती है ।
* दो बाते ईन्सान को अपनों से
दूर कर देती है एक तो उस
का अहंम और दूसरा वहेम ।
* परेशानी हालात से नहि गलत
खयालों से पैदा होती है एक शौख
बेमीशाल रखा करो हर हालत मे
होंठो पे मुस्कान हमेंशा रखा करो ।
* कभी हम गलत नहि होते
लेकिन वो शब्दें नहि होते
जिस से हम खुद को सहि
साबित कर शके ।
* अगर आप गलतियों से सबक
शिख लेते हो तो वो आप के
लिए सफलता कि सीडी है ।
* दुनाया नतीजा को पुरस्कार
देती है कोशिश को नहि ।
* कर्म के पास न कागज़ है न
किताब है लेकिन उस के पास
सारी दुनिया का हिसाब है ।
* ईन्सान अपनी गलतियों से
जीतना शिख जाय तो उसे
बहार कोई हरा नहि शकता ।
* दिल के सच्चे लोग भले अकेले
रह जाय लेकिन उस का साथ
कुदरत देती है ।
* जो मन कि बात नहि बता पाता उस
को हि क्रोध सब से अधिक आता है ।
* किसी के साथ टाईम पास करने के
लिए रिश्ता न रखे, रिश्ते को टाईम दे ।
* साफ साफ बोलने वाला कडवा जरूर
लगता है मगर धोखेबाज नहि होता ।
विनोद आनंद 11/08/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1663 अच्छाई

अच्छाई से अच्छा ईन्सान
बनकर मान,आदर सत्कार,
आशीर्वाद कमा शकते हो ।
किसी का अच्छा करना,
बूरा न करना हि अच्छाई है ।
एसी अच्छाई किस काम कि
अच्छाई करने वालों के साथ
लोग बूरा करे उस कि अच्छाई
का फायदा उठा के धोका दे ।
अच्छाई का लोग फायदा न उठाए
उसे के लिए पांच बातें याद रखे ।
* सावधान रहि है कि किसी गलत
ईन्सान के साथ अच्छाई करने के
बाद में पस्ताना न पडे ।
* दूसरों के लिए हमेंशा सेवा में
न रहे जिसे वो जब चाहे आप कि
अच्छाई का फायदा उठा शके ।
* जो तुम्हे पसंद नहि जो तुम नहि
करना चाहते उसे ना कहेना शीखे ।
* आप अच्छाई करे मगर अपना काम
छोड कर, बहुत ज्यादा समय न दे ।
* लोगों कि अच्छाई करो मगर बहुत
ज्यादा परवाह न करो, जिसे तुम्हारी
बिलकूल परवाह नहि ।
* आप किसे पे आधारित न रहो
किसे सहारे न जीओ खुद स्वतंत्र
तरिके से सेवा करके अच्छाई करो ।
अच्छाई करके अच्छा ईन्सान बनना
ईन्सान का फर्ज है, सावधान कोई
आप कि अच्छाई का फायदा न ले ।
विनोद आनंद 13/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1601 रिश्तें टूटते क्यूँ ?

जो टूट जाए वो रिश्ते नहि,जो
रिश्ते तोडे वो ईन्सान नहि ।
रिश्ते ईन्सान बनाता है अगर
वो हि रिश्ते तोडात है तो उसे
रिश्तों कि हेमीयत या रिश्तों
कि ताकात नहि पता है ।
वो रिश्तें का सिर्फ ईस्तमाल,
करता है निभाना नहि है ।
रिश्तें निभाने से टूटते नहि ।
रिश्तें में जिम्मेदारी होती है
न निभाने से रिश्ते टूटते है ।
रिश्तों में प्रेम होना जरूरी है,
प्रेम बीना रिश्तें टूटने लगते है ।
रिश्ते समर्पण से सँवरते है
स्वार्थ से रिश्तें टूटते है ।
मान सन्मान और मर्यादा
के अभाव से रिश्तें टूटते है ।
समझ से और सहन करने से
रिश्तें टिकटे है वरना टूटते है ।
क्रोध,लोभ,मद और ईर्षा रिश्तें
के जानी दुश्मन टोडते है रिश्ते ।
रिश्तें जीवन कि जडीबुट्टी बने
जीवन स्वस्थ,सफल सार्थक ।
रिश्तों को अग्रता देने से, हेमीयत
देने से, निभाने से और सँवारने से
रिश्तें टूटते नहि, मजबूत होते है ।
हम अपने हक पर ध्यान देते,
अपनी जिम्मेदारी पर ध्यान नहि
देते ईसलिए रिश्ते टूटते है ।
विनोद आनंद 18/05/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1491 श्रींगार

जैसे
बीन चाँदनी चाँद,
बीन खुसबू फूल,
बीन चाँद, सूरज
सितरे आकाश,
बीन प्राण शरीर,
बीन ईन्धन गाडी,
बीन प्रेम रिश्ते,
बीन संगीत गीत,
एसे
बीन चरित्र मनुष्य ।
बीन ईन्सानियत ईन्सान ।
बीन मानवता मानव ।
बीन व्यक्तित्व व्यक्ति ।
व्यक्तित्व,ईन्सानियत
मानवता और चरित्र
श्रींगार जीवन का ।
बीन श्रींगार जीवन
जैसे बीन श्रींगार दुल्हन ।
जीवन को दुल्हन कि भाँति
सजाओ सदगुणों से ।
विनोद आनंद 10/02/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1359 जिम्मेदारी

-जिम्मेदारी एक एहसास है ।
जिम्मेदारी देनी नही पडती,
लेनी पडती है और निभानी
पडती है उसे व्यक्ति का
व्यक्तित्व निखरता है ।
जिवन में हर मकाम पे सब
कि कुछ जिम्मेदारी होती है ।
जैसे विधार्थी कि जिम्मेदारी
अभ्यास करना, खुद कि सुरक्षा,
सहेत और मात पिता कि सेवा ।
जिम्मेदारी बोज नही,कर्तव्य है ।
जिम्मेदारी में बहाना बाजी और
दोषारोपण नही चलेगा ।
जिम्मेदारी से भागना या नज़रे
चुराना खुद को और अपनो को
धोखा देना है । जिम्मेदारी बीने
कि जिंदगी जानवर जैसी होती है
जिसे जिम्मेदारी नही होती ।
अपनी जिम्मेदारी दूसरों पे डाल के
खुद बेपरवाह हो जाना गदारी है ।
जिंदगी के हर पहेलु या क्षेत्र में
जिम्मेदारी होती है जो निभाते है
वो हि होते है कामीयाब ।
जिम्मेदारी बगैर कामीयाबी
एक रात्री का स्वप्ना है जो
जागते हि टूट जाता है ।
जिम्मेदार व्यक्ति हि ईन्सान
कहेलाता है वरना वो ईन्सान
के नाम पे कलंक होता है ।
जिम्मेदारी को हि जिंदगी का
स्वप्ना या उद्देश्य बनालो ।

विनोद आनंद 01/11/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड