1217 शक्ति कैसे बढाए ?

शक्ति क्या है ?
आत्म शक्ति, मन कि
और तन कि शक्ति ।
शक्ति का व्यय रोकने से
शक्ति कम नही होती ।
शक्ति के सही उपयोग से
शक्ति बढती है क्यूँकि
खुशी होती है, खुशी से
आत्मविश्र्वास और
शक्ति बढती है ।
अच्छा काम करने से
शक्ति बढती है और
गलत काम करने से
शक्ति घटती है ।
जरूरत से कम बोलने से,
सबसे मिल जूल के रहने से
लक्ष्य पर फोकस करने से
बहेस नही करने से और
बहादूर बन के काम करने से
शक्ति बढती है , वरना
शक्ति का व्यय होता है ।
गुस्सा,आवेश, तनाव और
चिंता से शक्ति कम होती है ।
प्रसन्न चित, शांति और
खुश रहने भी शक्ति बढेगी ।
मन पर संयम और तन को
स्वस्थ रखने से शक्ति बढती है ।
ईश्र्वर उर्जा का स्त्रोत उसे
भक्ति से जूडे रहने से तुम्हारी
शक्ति रीचार्ज होती है ।
काम से उर्जा खर्च होती ही
उस मोबाई कि बेटरी कि
तरहा रीचार्ज करना है ।
विनोद आनंद 24/06/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1172 क्रोध से मुक्ति कैसे ?

क्रोध एक आग सब कुछ
जलाकर राख कर देता है ।
शांति से क्रोध शांत होता है
क्रोध से शांति जलजाती है ।
क्रोध से मुक्ति यानी शांति ।
मगर कैसे हो क्रोध से मुक्ति
और मिलन शांति से ?
जिवन में कुछ भी चाहते हो
उसे पाने कि जिद्दी चाहत हो ।
एसी हि चाहत और जिद्द हो तो
तुम्हे क्रोध से मुक्ति मिल जाएगी ।
बस करना है संक्लप ईश्र्वर के
सन्मुख और प्रार्थना करके
मागनी है प्रेरणा, आर्शीवाद और
शक्ति क्रोध से मुक्ति पाने कि ।
फिर सोचना है क्या करना है ।
हमे हमेंशा याद रखना है कि मुझे
आज के बाद क्रोध नही करना है ।
हो जाए तो उसे खत्म करना है ।
अगर हर दिन यह करते रहे तो
क्रोध करना कम हो जाएगा और
अभ्यास से धीरे धीरे क्रोध से मुक्ति
पाने में सफल अवश्य होगे ।
जिवन में सुख शांति होगी ।
क्रोध समस्यो का मूल और
शांति समस्या का समाधान ।
विनोदआनंद 10/05/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1100 मेरा स्वभाव-3

मेरा स्वभाव मेरा सच्चा
साथी और जिगर दोस्त ।
मैं न निंदा, न चुगली और
न आलोचना करता हूँ किसी कि ।
कबूल करता हूँ अपनी गलती
माग कर माफी, और करता
हूँ माफ दूसरों कि गलतियाँ ।
मेरा स्वभाव मेरा जीवन
मेरी पहेचान, मेरे संस्कार ।
मैने दूसरों के गुण देखना,
खुद के दोष देखना शीखा है ।
स्वभाव में नकारात्मक द्रष्टि
नही हकारात्मक द्रष्टि रखना
शीखा है मैं ने ।
मेरा स्वभाव मेरी खुशी,
मेरी शांति और दौलत है ।
मेरे स्वभावने हि मुझे वक्ता,
और लेखक बनाकर दोस्त,
फिलोसोफर,गाईड बनाया ।
आभार शुकरीयाँ और धन्यवाद
ईश्र्वर का,श्रोताओ का और मेरे
विचारोंको पढने और पसंद करने वालो का ।
विनोद आनंद 01/03/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

952 संकल्प-सृष्टि

संकल्प से सृष्टि

या सृष्टि से संकल्प ।

ईश्र्वरने संकल्प से 

सृष्टि बनाई है ।

सृष्टि का मतलब परिस्थिति

हम परिस्थिति से संकल्पयानि सोचते है, वो सही नहीं ।

संकल्प का मतलब सोच 

सोच से परिस्थिति का निर्माण

सही तरीका है सृष्टि के निर्माण का ।

पहेले संकल्प यानि सोच 

सोच से सृष्टि का निर्माण ।

हम परिस्थिति आधारित

संकल्प करते है सोच ते है

इसलिए परिस्थिति ओर

बीगती जाती है । 

हमे अपनी अच्छि सोच से 

संकल्प करना है तो अच्छि 

बनेगी सृष्टि । अच्छि सोच

अच्छि परिस्थिति और 

अच्छि परिस्थिति यानि

अच्छि सृष्टि का निर्माण ।

संकल्प से सृष्टि सही है ।

सृष्टि से संकल्प सही नहीं है ।

विनोद आनंद                               25/10/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

947 ज्ञान

ज्ञान सबसे महान

सबसे पवित्र और पूजनीय ।

ज्ञान का देवता है सूरज, 

करता है दुनिया में उजाला, 

ज्ञान करता है जीवन में उजाला ।
राजा पूजनीय देश में 

ज्ञानी पूजनीय सर्वत्र ।

ज्ञान उजाला और 

जीवन कि रोशनी 

अज्ञान जीवन का अंधकार ।

ज्ञान बीना जग सुना निरश

ज्ञान ही सब कुछ जीवन में ।

ज्ञान संग भक्ति जूडे तो ज्ञानी 

भक्त ईश्र्वर को अति प्रिय ।

ज्ञान ईश्र्वर, ईश्र्वर ही ज्ञान है ।

ज्ञान कि गंगा बहाते चलो 

भक्ति का यमुना बहाते चलो

जीवन को सफलता,सार्थकता

समृद्धि कि दिशा दिखाते रहो ।

ज्ञानी बनो अज्ञानी नही 

ज्ञान होते हुए भी ज्ञान का

ईस्तमाल न करे वो है मूढ ।

विनोद आनंद                               11/10/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

853 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-37

💞 स्वर्ग भी बसेगा 

माया का पर्दा खुलेगा तो 

ईश्र्वर का दर्शन भी होगा ।

दर्शन भी होगा दिल भी मिलेगा ।

दिल भी मिलेगा तो प्रेम भी बरसेगा ।

प्रेम भी बरसेगा तो दिल भी खिलेगा ।

दिल भी खिलेगा तो खूशबु भी फैलेगी ।

खूशबु भी फैलेगी तो माहोल महेंकेगा ।

माहोल महेंकेगा तो धरती, 

पर स्वर्ग भी बसेगा ।

👪 संबंध को समझो 

प्रेम से संबंध खिलते है, 

नफरत से मुरझाते है ।

सेवा से संबंध बढते है

स्वार्थ से संबंध घटते है ।

प्रशंसा से संबंध कायम रहेते है ।

निंदा से संबंध हंगामी रहते है ।

समर्पण से संबंध मजबूत बनते है

हक छीनने से संबंध मरते है ।

मीठे वचन सही व्यवहार से, 

संबंध शाश्र्वत बनने है ।

कटु वचन, गलत व्यवहार से, 

संबंध टूटते है ।

मिलते जुलते रहनेसे, 

संबंध निखरता है ।

ताल मेल मिलाते  रहोगे, 

तो संबंध सँवरता है ।

संबंध को समजो, 

तो जीवन सँवरेंगा ।

💝 आप निर्देशक हो

मन शुध्ध है तो स्वर्ग,  

मन अशुध्ध है तो नर्क  ।

मन पवित्र है तो स्वर्ग ,  

मन अपवित्र है तो नर्क  ।

मन सकारात्मता है तो स्वर्ग , 

मन नकारात्मता है तो नर्क  ।

मन शांत तो है तो स्वर्ग

मन अशांत है तो नर्क है ।

मन संत हो तो स्वर्ग, 

मन शैतन है तो नर्क ।

मन ही निर्माता है 

स्वर्ग या नर्क का ।

आप निर्देशक है ।

क्या चाहते हो स्वर्ग या नर्क ? 
विनोद आनंद                                20/07/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

768 जीने का शलीका नही आया

ओ जीने वाले तुझे जीन का

सही शलीका नही आया ।

जीवन एक उपवन है तुने

कांटो का बन बना दिया ।

जीवन खूबसूरत है तुने

बदसूरत बना दिया ।

जीवन अनमोल है तुने

किंमत लगाली,बोली लगाली ।

जीवन का सफर आत्म

कल्याण के लिए है तुने 

काया कल्याण में लगा दिया ।

हे मानव ! तुझे जीन का 

सही शलीका नही आया ।

जीवन सेवा समर्पण के लिए

तुने खुद कि मावजत में  लगा दिया ।

जीवन, पुण्य आशीर्वाद और 

कृपा कमाने के लिए तुने पाप

और पैसा कमाने लगा दिया ।

जीवन ईश्र्वर मिलन के लिए तु

ईश्र्वर के वियोग में जीने लगा ।

हे मानव ! तुझे जीन का 

सही शलीका नही आया । 

जीवन सिर्फ जीना नही

जीवन को जीतना भी है ।

विनोद आनंद                               07/05/2017

फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड