1808 खुबसुरत जिंदगी

जिंदगी बहुत खुबसुरत है
उसे बदसुरत मत बनाना ।
अनमोल मानव जन्म मिला,
खुबसुरत प्रकृति और नजारें,
जिंदगी को खुबसुरत बनाना ।
मानव के पास शक्तिशाली मन
पांच ज्ञानेन्द्रियाँ से ज्ञान प्राप्ति,
कर्मेन्द्रियाँ से काम करने कि
क्षमता, तुम्हे श्रेष्ठ बना शकती है ।
जिंदगी को खुबसुरत बनाने कि
चाहत,खुबसुरत अभिगम जिंदगी
को खुबसुरत बना शकती है ।
यह नहितो जिंदगीकि खुबसुरती
का मझा नहि लूट शकते ।
जैसी द्रष्टि ऐसी जिंदगी,
जैसी सोच एसी जिंदगी,
जैसा कर्म एसी जिंदगी ।
अच्छि सोच, सकारात्मक
द्रष्टि और सत्कर्म से जिंदगी
को सँवारना तो जिंदगी कि
खुबसुती नजर आएगी ।
विनोद आनंद 29/11/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1774 आदर्श जीवन बन जाएगा

हसते हसते जी लो जीवन,
तुम्हारा जीवन खुशियों से
भर जाएगा ।
खुशी खुशी जी लो जीवन,
तुम्हारा जीवन बदल जाएगा ।
भुला भुला के भूतकाल जी लो
जीवन,वर्तमानमें जीना आजाएगा ।
छोड के चिंता भविष्य कि जी लो
जीवन,तुम्हारा जीवन सँवर जाएगा ।
गलत आदतें छोड के जी लो जीवन
तुम्हारा जीवन सुधर जाएगा ।
नकारात्मक सोच बदल के जी लो,
जीवन सकारात्मक बन जएगा ।
दुर्भावनाएँ बदल के जी लो जीवन
तुम्हारा जीवन सुंदर बन जाएगा ।
अच्छे कर्म करके जी लो जीवन,
तुम्हारा नसीब बदल जाएगा ।
साथ सहकार से जी लो जीवन,
जीवन अदभूत बन जाएगा ।l
छोड कर चिंता जी लो जीवन,
तुम्हारा जीवन सुख शांति से
भर जाएगा ।
मन को नया बना के और ह्रदय
परिवर्तन करके जी लो जीवन, तो
तो जीवन आदर्श बन जाएगा ।
विनोद आनंद 01/11/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1731 भावों कि शुध्धि

शरीर शुध्धि निरोगी
रहने के लिए जरूरी है ।
विचार शुध्धि सत्कर्म के
लिए है और बूरे कर्म नहि
करने लिए जरूरी है ।
उसे ज्यादा आवश्यक है
भावों कि शुध्धि क्यूँ कि
विचार से ज्यादा व्यक्ति
भावनाओ से प्रभावित
हो कर काम करता है ।
भाव शुध्धि के लिए चार
भाव पर ध्यान देना है ।
मैत्री-प्रेम भाव, प्रसन्न
भाव, करूणा भाव और
कृतज्ञ भाव प्रगट हो तो,
भावों कि शुध्धि होती है ।
यह सब भाव भितर से
प्रभावित होते है ।
उसे विपरीत दुश्मनी,क्रूरता,
उदासीता,अकृतज्ञता से
भाव शुध्धि नहि होती है ।
यह सब भावों बाहर से
हि प्रभावित होते है ।
शुध्ध भावों का नतीजा है
सहि कर्म और अशुध्ध भावों
का नतीजा है गलत कर्म ।
अच्छे कर्मो के लिए शरीर और
विचार शुध्धि के साथ साथ
भावों कि शुध्धि आवश्यक है ।
विनोद आनंद 18/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1609 नतीजा

नतीजा यानी परिणाम यानी
महेनत या कर्मो का फल ।
जैसा कर्म करेगा एसा फल
देगा भगवान, जैसी महेनत
करोगे एसा नतीजा आएगा ।
बीना महेनत बीना कर्म फल
मिलता हि नहि, सफलता
महेनत कि दासी है । श्रीमद्
भगवद् गीता में कहा है कि
कर्म करने में तेरा अधिकार
है फल में नहि, कैसा और
कब फल देना मेरे हाथ में है,
तु सिर्फ कर्म किए जा फल
तो असश्य मिलेगा उस कि
चिंता मत कर । किस ने सच
हि कहा कि बूरे काम का बूरा
नतीजा । बूरे काम करने से
पहेले सत बार सोचना नतीजा
क्या होगा, करना सोच विचार
तो शायद कदम रूक जाए ।
कुछ भी बोलने से या कुकर्म
करने से पहेले सोचना फिर
बोलना या कर्म करना वरना
बुरे कामका बूरा नतीजा यह सच
हो जाएगा तब पस्ताना पडेगा ।
विनोद आनंद 24/05/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1571 पवित्र त्रिवेणी संगम

गंगा,यमुना और सरस्वती
नदियों का त्रिवेणी संगम
बना है पवित्र तीर्थ स्थान ।
जिंदगी में भी कई त्रिवेणी
संगम हो तो, जिंदगी बने
सफल, सार्थक और पवित्र
तीर्थ स्थान बने जिंदगी ।
– जिंदगी में प्रेम, दया,करूणा
का त्रिवेणी संगम हो तो बने
जिंदगी पवित्र तीर्थ स्थान ।
– मन बुध्धि और आत्मा का हो
त्रिवेणी संगम हो तो, जिंदगी
बने पवित्र और संयमी ।
– मन,वचन और कर्म में एकता
का संगम हो तो जिंदगी बने
पवित्र और महान ।
– सद् विचार,सद् भाव और
सदाचरण का हो त्रिवेणी
संगम तो जिंदगी बने पवित्र
और यादगार तीर्थ स्थान ।
– सेवा, समर्पण और ईश्र्वर कि
शरणागति का त्रिवेणी संगम हो
तो बने जिंदगी पवित्र तीर्थ स्थान ।
जिंदगी में सभी त्रिवेणी संगम
हो तो जिंदगी बनेगी बेमिसाल,
पवित्र प्रेरणा का तीर्थ स्थान ।
विनोद आनंद 19/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1548 यह कभी नहि कहेना

यह कभी न कहेना कि
मेरा नसीब खराब है,
कयूँ कि नसीब तुम्हारी
हि लिखी हुई कहानी है
जो तुम जी रहे हो ।
हो शके तो जीते जी
एक अच्छी, जैसे चाहो
एसी कहानी लिखो कर्म
कि कलम से तो, फिर
नही कहेना पडेगा मेरा
नसीब अच्छा नहि है ।
यह न कहेना कि यह
काम मैं नहि कर शकता
क्यूँकि एसा कहने से
मन वो काम नहि करेगा ।
हो शकेतो कहो यह काम
आसन है मैं करूँगा,तो
मन ना नहि कहेगा और
तुम काम कर शकोगे ।
यह मत कहेना कि मुझे
कोई प्यार नहि करता
क्यूकि प्यार के बदले में
हि प्यार मिलता है ।
प्यार करके देखो फिर
नहि कहेना पडेगा कि
कोई प्यार नहि करता ।
यह न कहेना कोई मुझे
नहि समझता क्यूँ कि
हमे खुद को समजना है
फिर दूसरों को तब सब
तुम्हे समझेंगे ।
यह न कहेना कि जिंदगी
कठीन है क्यूँ कि कठीन
कहने से जिंदगी आसान
नहि बनेगी । हो शकेतो
कहेना कि जिंदगी आसान है ।
तो लगेगी जिंदगी आसान ।
जो कुछ नहि कहेने को कहा
है बस एसा न कहे ।
विनोद आनंद 27/03/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1475 जीवन दर्पण

काच के दर्पण में अपनी
सूरत बहुत बार देखली,
जो कुदरत ने बनाई है ।
अब जीवन दर्पण में कर्मो
कि तस्वीर देखो जो तुमने
बनाई है, कैसी लगती है ?
अगर खुबसूरत है तो ओर
सँवारो और बदसुरत है तो
उसे खुबसूरत बनाओ ।
कुदरत तुम्हारी सूरत नही
तुम्हारी कर्मो कि तस्वीर
देखकर तकदीर लिखता है ।
बुरे कर्म करके किस्मत को
कोसना और अच्छे कर्म नही
करना वो तो मूर्खता है ।
अच्छे कर्मो कि खेती से अच्छि
किस्मत कि फसल होगी ।
ईसलिए जीवन के दर्पण में
कर्मो कि तस्वीर सँवारो
तो किस्मत अपने आप
सँवर जाएगी ।
विनोद आनंद 30/01/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

खुबसूरत