1609 नतीजा

नतीजा यानी परिणाम यानी
महेनत या कर्मो का फल ।
जैसा कर्म करेगा एसा फल
देगा भगवान, जैसी महेनत
करोगे एसा नतीजा आएगा ।
बीना महेनत बीना कर्म फल
मिलता हि नहि, सफलता
महेनत कि दासी है । श्रीमद्
भगवद् गीता में कहा है कि
कर्म करने में तेरा अधिकार
है फल में नहि, कैसा और
कब फल देना मेरे हाथ में है,
तु सिर्फ कर्म किए जा फल
तो असश्य मिलेगा उस कि
चिंता मत कर । किस ने सच
हि कहा कि बूरे काम का बूरा
नतीजा । बूरे काम करने से
पहेले सत बार सोचना नतीजा
क्या होगा, करना सोच विचार
तो शायद कदम रूक जाए ।
कुछ भी बोलने से या कुकर्म
करने से पहेले सोचना फिर
बोलना या कर्म करना वरना
बुरे कामका बूरा नतीजा यह सच
हो जाएगा तब पस्ताना पडेगा ।
विनोद आनंद 24/05/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1571 पवित्र त्रिवेणी संगम

गंगा,यमुना और सरस्वती
नदियों का त्रिवेणी संगम
बना है पवित्र तीर्थ स्थान ।
जिंदगी में भी कई त्रिवेणी
संगम हो तो, जिंदगी बने
सफल, सार्थक और पवित्र
तीर्थ स्थान बने जिंदगी ।
– जिंदगी में प्रेम, दया,करूणा
का त्रिवेणी संगम हो तो बने
जिंदगी पवित्र तीर्थ स्थान ।
– मन बुध्धि और आत्मा का हो
त्रिवेणी संगम हो तो, जिंदगी
बने पवित्र और संयमी ।
– मन,वचन और कर्म में एकता
का संगम हो तो जिंदगी बने
पवित्र और महान ।
– सद् विचार,सद् भाव और
सदाचरण का हो त्रिवेणी
संगम तो जिंदगी बने पवित्र
और यादगार तीर्थ स्थान ।
– सेवा, समर्पण और ईश्र्वर कि
शरणागति का त्रिवेणी संगम हो
तो बने जिंदगी पवित्र तीर्थ स्थान ।
जिंदगी में सभी त्रिवेणी संगम
हो तो जिंदगी बनेगी बेमिसाल,
पवित्र प्रेरणा का तीर्थ स्थान ।
विनोद आनंद 19/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1548 यह कभी नहि कहेना

यह कभी न कहेना कि
मेरा नसीब खराब है,
कयूँ कि नसीब तुम्हारी
हि लिखी हुई कहानी है
जो तुम जी रहे हो ।
हो शके तो जीते जी
एक अच्छी, जैसे चाहो
एसी कहानी लिखो कर्म
कि कलम से तो, फिर
नही कहेना पडेगा मेरा
नसीब अच्छा नहि है ।
यह न कहेना कि यह
काम मैं नहि कर शकता
क्यूँकि एसा कहने से
मन वो काम नहि करेगा ।
हो शकेतो कहो यह काम
आसन है मैं करूँगा,तो
मन ना नहि कहेगा और
तुम काम कर शकोगे ।
यह मत कहेना कि मुझे
कोई प्यार नहि करता
क्यूकि प्यार के बदले में
हि प्यार मिलता है ।
प्यार करके देखो फिर
नहि कहेना पडेगा कि
कोई प्यार नहि करता ।
यह न कहेना कोई मुझे
नहि समझता क्यूँ कि
हमे खुद को समजना है
फिर दूसरों को तब सब
तुम्हे समझेंगे ।
यह न कहेना कि जिंदगी
कठीन है क्यूँ कि कठीन
कहने से जिंदगी आसान
नहि बनेगी । हो शकेतो
कहेना कि जिंदगी आसान है ।
तो लगेगी जिंदगी आसान ।
जो कुछ नहि कहेने को कहा
है बस एसा न कहे ।
विनोद आनंद 27/03/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1475 जीवन दर्पण

काच के दर्पण में अपनी
सूरत बहुत बार देखली,
जो कुदरत ने बनाई है ।
अब जीवन दर्पण में कर्मो
कि तस्वीर देखो जो तुमने
बनाई है, कैसी लगती है ?
अगर खुबसूरत है तो ओर
सँवारो और बदसुरत है तो
उसे खुबसूरत बनाओ ।
कुदरत तुम्हारी सूरत नही
तुम्हारी कर्मो कि तस्वीर
देखकर तकदीर लिखता है ।
बुरे कर्म करके किस्मत को
कोसना और अच्छे कर्म नही
करना वो तो मूर्खता है ।
अच्छे कर्मो कि खेती से अच्छि
किस्मत कि फसल होगी ।
ईसलिए जीवन के दर्पण में
कर्मो कि तस्वीर सँवारो
तो किस्मत अपने आप
सँवर जाएगी ।
विनोद आनंद 30/01/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

खुबसूरत

1447 कहेवते

बातें है पुराणी फिर भी है
ताजी, सच्ची, प्रसिध्ध और
कहती है जीवन का मर्म
ईसलिए उसे कहते,कहेवते ।
लेकिन वो बातें भूल गए है हम
जिसे पढना है समजना है
और जीवन में उतारना है ।
वो बातें है….. जैसा कर्म
करेगा एसे फल मिलेगा ।
पेड बबूल का बोओगे तो
आम कहासे खाओगे ।
बस यह समज लिया तो
सुधर जाएगा जीवन ।
कहेवते है गुरू,साथी और
मार्गदर्शक । कहेवते है
जीवन का निचोड, ज्ञान
का भंडार । बीना ज्ञान
जीवन निरस, कहेवते
बीना है जीवन सुना ।
कहेवते है जीवन का
श्रींगार, सँवारे जीवन ।
कहेवते कदी ना भूलना ।
दोहराते रहेना ।
कहेवत : संग एसा संग ।
कल करे सो आज कर
आज करे सो अब,पल में
परलय होगा, बहोरी
करेगा कब । काम क्रोध
और लोभ नर्क के द्वार ।
कहेवतो को ढूँढनते रहो
सुनते रहो और जीवन में
समजकर उतारते रहो ।
विनोद आनंद 01/01/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1365 सुखद परिवर्तन

-बदली बदली नज़र आएगी
दुनिया जब बदलेगी द्रष्टि ।
बदलेगी द्रष्टि तो सोच भी
बदलेगी । सोच बदलेगी तो
बदलेगा व्यवहार वाणी कर्म ।
व्यवहार वाणी कर्म बदले
तो फल बदलेगा ।
फल बदले तो सुख शांति
आएगी, कम हो दुःख ।
द्रष्टि बदले तो सब कुछ
बदले और सब कुछ
बदले तो जीवन बदले ।
सब का जीवन बदले
तो बदली बदली नज़र
आए दुनिया ।
नकारात्मक द्रष्टि से
हकारात्मक द्रष्टि बने तो
आए सुखद परिवर्तन ।
सुखद परिवर्तन बने
स्वर्ग कि सीडी ।
विनोद आनंद 04/11/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1358 सोच का विज्ञान

सोच ने से पहेले उस का
विज्ञान जानोगे तो सोच में
दम होगा, कर्म में दम होगा ।
सोच कर्म कि माता है जैसी
होगी माता एसा होगा बच्चा ।
बुरी होगी सोच बुरे होगे कर्म
बुरे होगा कर्म तो, बुरा होगा फल ।
बडी,अच्छि सोच महान बनाती है ।
सोचने में कंजूसाई मत करो ।
सोच सोच के परेशान न हो ।
सोच पे नियंत्रण से हि अच्छि
और बडी सोच, सोच शकते हो ।
नियंत्रीत बडी और अच्छि सोच
का स्वप्ना देखो फिर सोच को
हकिकत बनाने का प्रयास करो
तो सोच बनेगा कर्म, जरूर देगी
सफलता का फल । सोच और
सफलता का फासला मीटाना है ।
हर सोच सफलता बन शकती है
अगर उसे स्वप्ना बनालो ।
सोच हि सफलता का वृक्ष है ।
सही सोच तो सही कर्म और
सही कर्म तो सफल,समृध्ध जीवन ।
सकारात्मक सोच सुख का सरोवर ।
नकारात्मक सोच दुःख का दरिया ।
विनोद आनंद 01/11/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड