2122 जीवन पथ

जीवन पथ पर चलने वालों को
नहि पता, वो कितना है लंबा ।
लेकिन यह पता है कि पहेला
स्टेशन जन्म, अंतिम स्टेशन
है मौत, बीच में कई चिंता कि
खाई, मुशीबतों के पहाड और
दुःख दर्द के काँटे आएँगे फिर
भी हमे सुख शांति और हसी
के फूल खिलाना है ।
बीच में काम, क्रोध, लोभ, मोह
मद और मत्सर के कई वीरान
स्टेशन आएँगे मगर रूकना नहि ।
अगर रूकना है तो प्रेम, दया
करूणा और अहिंसा जैसे कई
रमणीय स्टेशन पर रूकना जो
जीवन पथ को आसान,सुंदर,
तनाव और चिंता मुक्त बनाएगा ।
बीच में कई बुरी आदतों के गंदे
स्टेशन आएँगे वहाँ नहि रूकना ।
अगर रूकना है तो सही आदतों
के स्वच्छ स्टेशन पर रूकना तो
जीवन पथ सँवारेंगा, महेकेगा ।
अंतिम स्टेशन पे न होगा कोई
शिकवा, न शिकायत, न कामना
जहाँ पुण्य-सुसस्कारों कि गढरी
ले कर उतरना है, नहि कि पाप
और कुसंस्कारों कि गढरी लेकर ।
जीवन पथ पर चलने वालों यह तय
करो कि हमे सुसस्कारों, पुण्य कि
गढरी बाधनी है तो हमे रमणीय,
सुंदर, स्वच्छ स्टेशन पर रूकना है
नहि के गंदे और वीरान स्टेशनों पे ।
जीवन पथ पर चलने वालों यह
जानलो कि अच्छी और सही पसंद
अच्छा और सहि फल मुक्ति का
मिलेगा वरना फिर वो हि जीवन
पथ मिलेगा सँवारने के लिए जब
तक नहि सवाँरोंगे ।
विनोद आनंद 30/07/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

2091 मोक्ष कहते है जिसे…

मोक्ष कहते है जिसे वो
सिर्फ है मोह का क्षय,
मतलब मोह का त्याग ।
मोह कहते है जिसे वो
सिर्फ है आशक्ति व्यक्ति
वस्तु और संसार के प्रति ।
आशक्ति कहेते है जिसे वो
सिर्फ है पागलपन व्यक्ति,
वस्तु, और संसार के प्रति ।
मोक्ष कहते है जिसे वो सिर्फ
है मन कि गुलामी से मुक्ति ।
मन कि गुलामी मतलब मन
कि मन मानी और हुकूमत ।
मन पर हकूमत हि है मोक्ष
मोक्ष कहते है जिसे वो है
सिर्फ काम, क्रोध और लोभ
जैसे कसाई से छूटकारा ।
प्रेम, दया, करूणा, संतोष
और शांति जैसे सद् गुणों
से प्रति हि है मोक्ष ।
मोक्ष कहते है जिसे वो है
निष्काम कर्म जो है बंधन
मुक्त कर्म, हि है मोक्ष ।
मोक्ष कहते है जिसे वो है
सिर्फ जिंदगी कि मंझिल और
जिंदगी जीनेका सहि तरिका ।
विनोद आनंद 08/07/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

2045 आध्यात्मिक और व्यवहारीक जीवन

आध्यात्मिक जीवन और
व्यवहारीक जीवन अलग
नहि है वो दोनों एक हि है ।
सोचो आध्यात्मिक जीवन,
व्यवहारी जीवन बीना कैसा
होगा और व्यवहारी जीवन,
आध्यात्मिक जीवन बीना
कैसा होगा । दोनों जीवन
अभिन्न जीवन है ।
तुम्हारा व्यवहारी जीवन
का आधार आध्यात्मिक
जीवन होना चाहिए ।
शरीर पर केन्द्रित, काम
क्रोध, लोभ,मोह, मद, मत्सर
और स्वार्थ युक्त व्यवहारी
जीवन जीते हो तो वो जीवन
सफल नहि होता है ।
आत्मा पर केन्द्रित सत्य, प्रेम,
दया, करूणा और भक्ति युक्त
व्यवहारी जीवन जीते हो तो
सफल जीवन होता है ।
व्यवहारी जीवन में कुशलता
और आध्यात्मिक जीवन में
ईश्र्वर में श्रध्धा,विश्र्वास और
भक्ति अनमोल जीवन जीने
का सहि तरिका है ।
आध्यात्मिकता बीना जीवन
मानव जीवन नहि शैतान या
जानवर जीवन भाँति है ।
विनोद आनंद 03/06/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1981 खुद से प्यार करो

क्या आप खुद से प्यार
करते हो ? आप कैसे भी
हो जहाँ भी हो, कैसी भी
परिस्थिति में हो खुद से
नाराज न हो, खुद को न
कोसो, खुद को स्वीकार
करके खुद को खुश रखो
और खुद पर गर्व करो तो
समझो कि तुम खुद से
बहुत प्यार करते हो ।
अपनी सुरक्षा, शारीरिक
और मानसिक स्वास्थ्य
पर ध्यान दे कर खुद को
निरोगी रखोगे, तो समझो
कि खुद से प्यार करते हो ।
गलत आदतें और व्यसनों
से कोसों दूर रहोगे तो समझो
तुम खुद से प्यार करते हो ।
आप मन में प्रेम,दया करूणा
जैसी भावनाएँ प्रगट करे तो,
समझो कि तुम खुद से बहुत
प्यार करते हो ।
सब के प्रति मान सन्मान
सद् भाव, सम्भाव, ईश्र्वर
भाव और परोपकार भाव
रख शको तो, समझो कि तुम
खुद से बहुत प्यार करते हो ।
आप का स्वभाव छल कपट
से मुक्त है और शुध्ध, निर्मल हो
तो समझो आप खुद से प्यार
करते हो ।
आप काम क्रोध लोभ नर्क के
द्वार पर नहि खडे है तो समझो
तुम खुद से प्यार करते हो ।
खुद से प्यार करता है वो सब
को प्यार कर शकता है और
उसे सब प्यार करते ।
विनोद आनंद 17/04/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड