1777 क्रोध मत करना

क्रोध दुश्मन मानव का ।
किया तो झगडा, अशांति ।
कभी सहि वक्त क्रोध करना
आवश्यक होता है लेकिन
हर वक्त बातों बातों में क्रोध
करना आवश्यक नहि ।
कुछ वक्त क्रोध मत करना
आवश्यक होता है..जिसे
जिदगी में सुख शांति मिलेगी ।
* कभी बहार जाते वक्त क्रोध
मत करना ।
* घर में आ के क्रोध मत करना ।
* सोने से पहेले क्रोध मत करना ।
* जिस का तुम पर उपकार है
उस पर क्रोध मत करना ।
* धर्म स्थान में क्रोध मत करना ।
* बोश-मालिक पर क्रोध मत करना ।
* जिस को तुम नहि देख रहे उन
पर क्रोध मत करना ।
जीवन में क्रोध न करने का अभ्यास
करने से क्रोध पर काबू पा शकते है ।
मौन से क्रोध पर काबू पा शकते है ।
विनोद आनंद 04/11/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1750 एक जान, सो दुश्मन

एक जान और सो दुश्मन
हमारे दोस्त कम है और
दुश्मन ज्यादा तो क्या करे ?
दुश्मन कौन, जरा जाने और
कम करके दोस्त बनाए ।
पहेला दुश्मन तुम खुद हो ।
दूसरा दुश्मन है तुम्हारा मन ।
तुम्हार मन ईन्द्रियो का गुलाम
और आप मन के गुलाम ।
ओर कई दुश्मन आप के मन
में पनाह लिए हुए बैठे है ।
वो षढ दुश्मन है काम, क्रोध
लोभ, मोह, मद और ईर्षा ।
यह सब भीतर के दुश्मन है
न जाने बहार के कितने होंगे ।
आप के दुर्गुणें,बूरी आदतें और
दुर्भावनाए, दुश्मन से कभ नहि ।
दुश्मन बहार के या भीतर के
उसे बचना या दुश्मनी खत्म
करो या समाधान करो ।
दुश्मननो के साथ जीना भी
क्या जीना है जिसे तकलीफें,
मुश्किलें और परेशान और
दु:खी होकर जीना पडता है ।
कम दुश्मन और अच्छे दोस्त
और परिवार के साथ हसी
खुशी और शांति से जीना हि
सही तरीका है जीनेका ।
ओर छूपे दुश्मन है सोसीयल
मीडीया और टेलीवीशन जो
आप के जीवन के महत्त्वपूर्ण
समय बरबाद करते है और आप
कि एकाग्रता कम करते है ।
सावधान एसे दुश्मनो से उसे
छुटका पाने का सोचो ।
एक जान और सो दुश्मन तो
कैसे चैन और सुख शांति कि
जिंदगी जी पाओगे जरा सोचो ।
विनोद आनंद 08/10/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1697 गुस्से का विज्ञान-1

गुस्सा सब को आता है
बहुत कम लोग होंगे जिसे
गुस्से पे काबू होता है ।
गुस्सा स्वभाव बन गया है ।
जिस को सब पर नियंत्रण
रखना है उसे गुस्सा आता है ।
जब कोई उस कि बात नहि
सुनता तब वो गुस्स होता है ।
जब आप कि अपेक्षा पूर्ण नहि
होती तब गुस्सा आता है ।
जो हर बक्त हर बात का मजा
लेना चाहता है और जब नहि
होता तब वो गुस्सा होता है ।
जो हमेंशा परफेक्सन-पूर्णता
कि उमीद करता है और नहि
होता ईसलिए गुस्सा होता है ।
कई वज़ह होती है गुस्से कि
जैसे अपमान, अहम्, अपूर्ण
ईच्छाए और बेवजह ईन्सान
गुस्सा करता है और वो तो
जिवन में करना पडता है
एसा समजता है ।
बात बात पे गुस्सा आना
ताकत नहि कमजोरी है ।
एसे तो अगर आप सच है
तो आप को गुस्सा नहि
होना है और अगर आप
गलत है तो गुस्सा करने
का तुम्हे कोई हक नहि है ।
गुस्सा जैसे जलता हुआ
कोयला तुम्हारे हाथ में
पहेले तुम भी जलोगे और
जिस पर गुस्सा होगे वो
भी जलेगा जिसे किस का
भी कल्याण नहि होते, तो
क्यूँ गुस्सा करना चाहिए ।
ज्यादा जानकारी के लिए
पढीए गुस्सा का विज्ञान-2 क्रमशः
विनोद आनंद 16/08/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1692 कही सुनी बातें

* अच्छे वक्त के लिए बूरे वक्त
का सामना करना पडता है ।
बुरे वक्त में शांत रहे और
अच्छे वक्त में समतुलीत रहे ।
* जिंदगी में कभी किसी को
बेकार मत समजना क्यूँ कि
बंध घडी भी दिन में दो बार
सहि समय बताती है ।
* दो बाते ईन्सान को अपनों से
दूर कर देती है एक तो उस
का अहंम और दूसरा वहेम ।
* परेशानी हालात से नहि गलत
खयालों से पैदा होती है एक शौख
बेमीशाल रखा करो हर हालत मे
होंठो पे मुस्कान हमेंशा रखा करो ।
* कभी हम गलत नहि होते
लेकिन वो शब्दें नहि होते
जिस से हम खुद को सहि
साबित कर शके ।
* अगर आप गलतियों से सबक
शिख लेते हो तो वो आप के
लिए सफलता कि सीडी है ।
* दुनाया नतीजा को पुरस्कार
देती है कोशिश को नहि ।
* कर्म के पास न कागज़ है न
किताब है लेकिन उस के पास
सारी दुनिया का हिसाब है ।
* ईन्सान अपनी गलतियों से
जीतना शिख जाय तो उसे
बहार कोई हरा नहि शकता ।
* दिल के सच्चे लोग भले अकेले
रह जाय लेकिन उस का साथ
कुदरत देती है ।
* जो मन कि बात नहि बता पाता उस
को हि क्रोध सब से अधिक आता है ।
* किसी के साथ टाईम पास करने के
लिए रिश्ता न रखे, रिश्ते को टाईम दे ।
* साफ साफ बोलने वाला कडवा जरूर
लगता है मगर धोखेबाज नहि होता ।
विनोद आनंद 11/08/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1635 ईतना तो करना प्यारे

कम खाओ, गम खाओ और
जरूरत से ज्यादा न बोलो ।
जो मिले उसे स्वीकरो और
हर पल खुस खुसाल रहो ।
ईतना तो करना प्यारे अगर
सुख शांति से जिना है तो ।
गम से न गभराना,समस्या से
न भागना और डरो से न डरना ।
अपनी भूल कबुल करके माफि
माग लेना, दूसरों कि भूल माफ
करके रिश्तों को सँवारना ।
ईतना तो करना प्यारे अगर
सुख शांति से जिना है तो ।
जैसा व्यवहार आप दूसरों से
नहि चाहते एसा व्यवहार आप
दूसरों के साथ मत करना ।
सब के प्रति सम् भाव, सद् भाव
प्रेम भाव, परोपकार भाव रखना ।
ईतना तो करना प्यारे अगर
सुख शांति से जिना है तो ।
किस कि निंदा, चाडी चुगली
न करना, दूसरों कि प्रगति में
बाधा न डालना खुस रहेना ।
जिंदगी में कम जरूरत हो,
अपनों से कोई अपेक्षा न हो ।
ईतना तो करना प्यारे अगर
सुख शांति से जिना है तो ।
जिंदगी में काम ,क्रोध, लोभ
मोह, मद, ईर्षा से बचो ।
नैतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक
जीवन जीओ ।
ईतना तो करना प्यारे अगर
सुख शांति से जिना है तो ।
विनोद आनंद 17/06/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1608 कौन शत्रु ? कौन दोस्त

दुनिया में, समाज में या घर में
कौन तुम्हारा शत्रु, कौन दोस्त ?
है पहेचानना है मुश्किल ? क्यूँ कि
तुम्हारा कोई ओर शत्रु या दोस्त
नहि है, आप खुद हि आप का
शत्रु या दोस्त हो और दूसरों को
अपना शत्रु या दोस्त मानते हो ।
आप सही तरीके से जिंदगी जीते
हो तो आप अपने हि दोस्त है ।
आप गलत तरीके जिंदगी जीते है,
तो आप हि खुद के बडे शत्रु हो ।
कोई तुम्हारा दुश्मन या दोस्त
नहि हो शकता । ईसलिए अपना
ध्यान दूसरों से हटाकर खुद पे
लगाओ और आप खुद को अपना
दोस्त बनाने का प्रयास करो ।
अगर आप खुद पर नियंत्रण करना
शीखकर और अपने आपको सुधार
कर सहि जिंदगी जीओगे तो आप
अपना दोस्त बन शकते हो ।
फिर तुम्हे को शत्रु का डर नहि है ।
दोस्त सुख शांति देता है या जो
सुख शांति दे वो तुम्हारा दोस्त ।
आप के षढ् रिपु है,काम, क्रोध,
लोभ, मोह, मद, ईर्षा उसे बचना ।
आपके षढ् दोस्त है शांति,प्रेम,दया
करूणा, ज्ञान, और आनंद है आत्मा
के सद् गुण उसे धारण करना ।
तुम खुद अपने दोस्त बनो शत्रु नहि ।
विनोद आनंद 24/05/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1603 क्रोध कैसे शांत करे ?

शांत रहे सो संन्यासी
क्रोध करे सो क्रोधी ।
क्रोध कैसे शांत हो ?
जब क्रोध आए, तुम्हे
पता होना चाहिए कि
आप को क्रोध आया है ।
जब आप को पता नहि कि
आप को क्रोध आया है ।
तब वो बढेगा, शांत नहि
कर पाओगे क्यूँ कि आप
होश में नहि है ।
आप को हर पल होश में
रहेना आवश्यक है क्यूँकि
होस हि क्रोध का ईलाज है ।
क्रोध करते वक्त होश में है
तो आप खुद को शांत करो,
खुद को कुछ दूसरे काम में
प्रवृत करो, वो पल या जगह
को छोड दो और सर पे ठंडा
पानी डाल कर खुदको शांत
करने कि कोशिश करो ।
क्रोध के वक्त खुद को दर्पण में
देखो आप कितने बदसूरत हो ।
आप होश में क्रोध कर शकते हो
तो वो बीमार का ईलाज होता है ।
जान बुझकर किए क्रोध पर
काबू पा शकते हो मगर बेहोश
में किया क्रोध बेकाबू होता है,
तो वो बडा गुन्हा कर शकता है ।
होश में किया क्रोध नुकशान
नहि करता और जब भी चाहो
शांत कर शकते हो ।
विनोद आनंद 20/05/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड