1211 नसा हि नसा

नसा हि नसा जिंदगी में
नसा न सान जिंदगी कि
नसा जिंदगी में है कलंक
जिंदगी खत्म हो लेकिन
नसा कदी न खत्म हो ।
नसे के धांसे में न आना
नसे से बचके रहेना हि
है जिंदगी कि सान ।
किसी को बीडी,सिगार
और दारू का नसा तो
किसी को मौज़ मस्ती,
रूपरंग या प्यार का,
और जवानी का नसा ।
किसी को पैसा और पद
का और सत्ता का नसा ।
नसे मे धूत और मन बेकाबु,
नसा न दोस्त किसी का वो
तो तन-मन-बुध्धि का शत्रू ।
नसा बनाए कमजोर लाचार
बेसहारा और करे बदनाम ।
नसा बने गले का फंदा एसे
नसे से दूर रहेना और बचना ।
नसा भक्ति का,अच्छे और
श्रेष्ठ ईन्सान बनने का जिंदगी
सुधारे सँवारे और महान बनाए ।
विनोद आनंद 17/06/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1209 शेर शायरीयों का गुलदस्ते-61

🌻 एतबार रखना
मन मिले फूल खिले कोई बात नही
दिल मिले प्रेम खिले कोई बात नही
हाथ मिले तो खुद पे एतबार रखना
कि वासना कि चिनगारी न भडके
वरना जवानी और जिंदगी दोनों
जल के राख हो जाएगी फिर न
बचेगा मन न बचेगा दिल और
न बचेगी बांसूरी न बजेगा गीत
बचेगो तो बदनाबी और बरबादी ।
🌺 मकस्द
किस्मत से मिले है कुछ तो
मकस्द होगा खुदा का ।
बीन बादल बरसात न हो
बीन कारण मुलाकात न हो
मिलन का मकस्द जाने और
मकस्द को हि जिंदगी बनाले ।
🌹 सावधान
जवानी पागल घोडा है
जिंदगी जब सवार होती है
तब सँभल नही पाती फिर
मुशीबत लाती है ।
जवानी के पागल घोडे
को मन कि लगाम और
संस्कार कि चाबूक
रखनी पडती है हाथ में
वरना जिंदगी बदनाम
और बरबाद होने में
देर नही लगेगी, सावधान
जब जवानी के पागल
घोडे पे हो सँवार ।
विनोद आनंद 15/06/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1208 सबक

सबक तो शीखना चाहीए
खुद या दूसरों के अनुभव से ।
क्यूँकि सबक से सुधार और
सुधार से बहेतर जिंदगी ।
जो गलतियाँ से सबक नही
शीखते वो एक ओर गलती
करके जिंदगी को कठीन
बनाकर परेशान होते है ।
जिंदगी का दूसरा नाम हि
सबक है , और सबक से
शीखने से जिंदगी में सब
कुछ ठीक कर शकते है ।
जिंदगीमें सबक से नही
शीखना है जिंदगी से बेवफाई ।
सबक से शीखने से भिवष्य में
मुश्किलीयाँ या परेशानियाँ
कम कर शकते है और सुख
शांति का जिंदगी जी शकते है ।
जिंदगी पाठशाला है उसमें
सबक शीखना मुनाशीत है ।
सबक से शीखते रहो, आगे बढते
रहो और कामीयाब होते रहो ।
विनोद आनंद 14/06/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1199 रिश्तें क्या कहते है ? सुनो

यह रिश्तें क्या कहते है
जरा सुनो, ध्यान दो नही तो
रिश्तें कमजोर बनते जाएंगे ।
रिश्तें कहते है कि बेरहेमी से पेश
न आओ वरना मैं टूट जाऊगा ।
हो शके तो मुझ पर रहेम करो ।
रिश्तें कहते है कि मुझे नफरत
से मत देखो वरना मै नफरत कि
आग में जल के राख हो जाऊगा ।
रिश्तें कहते है कि मुझ स्वार्थ के
रसायण में न भीगोओ वरना मैं
पीघल जाऊँगा हाथ नही आऊँगा ।
रिश्तें कहते है कि मुझे प्रेम और
स्नेह के पवित्र जल से नहलाओ मैं
पवित्र और शक्तिशाली बन जाऊँगा ।
रिश्तें कहते है कि मेरा मान सन्मान
करो और निभाने कि कोशिश करना ।
रिश्तें कहते है कि मुझे गलत
ईरादे और छल कपट से बचाना
वरना मैं तडप तडप के मर जाऊँगा ।
रिश्तें कहते है कि परिवार में मेलजुल
बढाना वरना किस पल मै बिखर जाऊँगा ।
रिश्तों से हि है जिंदगी वरना क्या
जिओगे ईसलिए जो मैं कहता हूँ उस
पर सोचो और रिश्तों को बचाओ
वरना तुम्हे कोन बचा एगा ?
विनोद आनंद 05/06/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1162 जिंदगी सिर्फ जिम्मेदारी

जिंदगी ओर कुछ भी नहि, है सिर्फ
जिम्मेदारीयाँ का सिलसिला ।
जन्म से मृत्यु तक जिम्मेदारीयाँ कि
राह पे चलना है और मंझिल पाना है ।
जिम्मेदारीयाँ निभाना हि जिंदगी का
उद्देश्य या मकसद या टारगे होता है।
जिम्मेदारीयों से भागना मतलब
जिंदगी से भागना होता है ।
जिम्मेदारीयों को बोज़ समझना
मतलब जिंदगी को बोझ समझना ।
जिंदगी है जिम्मेदारीयों का ढेर उसे
निभाते निभाते जिंदगी को हलका
और सरळ बनाना है वरना वोही
जिम्मेदारीयों का ढेर जिंदगी को
चकनाचूर कर देगा फिर जिनेका
मकसद हि खत्म हो जाएगा ।
जिम्मेदार व्यक्ति को हि जीनेका
हक होता है बेजिम्मेदार व्यक्ति,
समाज, परिवार देश पर बोज है ।
जिंदगी को और ईन्सानियत कि
किंमत जिम्मेदारीयाँ निभाने से हि
चुका शकते हो वरना देवादार बनके
फिर चुकाने के लिए जन्म मरण के
फेरों में पीसते रहोगे ईसलिए बहेतर
है कि अपनी जिम्मेदारीयाँ पूर्ण करो,
कोई कर्ज लेकर दुनिया से न जाना ।
जिम्मेदारी कर्ज है पिछले जन्म का
ईसलिए पूर्णता से चुका के जाना ।
विनोद आनंद 04/05/2018
फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

1160 जन्म मृत्यु के फेरे

जन्म के बाद मृत्यु
मृत्यु के बाद जन्म, है
जीवन का सिलसिला ।
शरीर मरता वो मृत्यु
नया शरीर मिलता है वो
जन्म, एक नया जीवन
जन्म कर्मो, वासना अंतिम
ईच्छा के अनुसार होते है ।
स्थूल शरीर को छोडकर
सूक्ष्म शरीर मन, बुध्धि
आत्मा जाता है तब वो
कर्मो, भावनाए, संस्कार
के साथ दूसरे शरीर में
जाता है, वो पूर्व जन्म का
संस्कार कहेलाता है ।
वो हि पुराने संस्कारो के
साथ नया जीवन जीता है ।
नये जीवन में पूर्व जन्म के
कर्मो का फल भोगना है
और नये अच्चे संस्कार
और नये सत्कर्म करना है ।
जैसे कर्म करोगे एसा नया
नया पुन: जन्म मिलेगा ।
हर जन्म में संस्कारी
बनना है और सत्कर्म करके
आत्मा कल्याण करना है ।
एक जन्म एसा आयेगा कि
आप जन्म मरण के फेरों से
मुक्त हो कर ईश्र्वर के परम
धाम में निवास करोगे ।
शायद ईसको मुक्ति कहते है ।
विनोद आनंद 29/04/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1140 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-56

😃 संकल्प
जिंदगी चाहे गम दे,
थोडा रो लो उस कि
तसल्ली के लिए ।
मगर संकल्प करो
जिंदगी को हसाने का
चहरे पे हसी और
होठों पे मुस्कान ला के ।
फिर जिंदगी हसाती रहेगी ।
🌻 जवानी
जवानी जोशीला घोडा
और खूबसूरती आशिक
सवारी करनी है तो
होस कि चाबूक और
संस्कार कि लगाम से
वरना बदनामी और
बरबादी कि खाई में
धकेल देगा ।
🌹नाकामीयाबी
नाकामीयाबी से नाउमीद
नाउमीद से निराशा और
अविश्वास जन्म लेती है ।
नकारात्मक प्रतिक्रया होती है
गलत बातों पे यकीन होता है
मन उसी के शरण लेता है
और कुछ गलत काम करता है ।
नकारात्मक प्रतिक्रया न करो ।
सकारात्मक सोचो, खुद पर
विश्वास रखो, गुरू का शरण
और उमीद का दिया जला कर
नाउमीद के राक्षस को भगाओ
वरना वो नाउमीद का राक्षस
जीवन के योध्धा को मार डेगा ।
विनोद आनंद 08/04/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड