891 रुठना मनाना

रुठना-मनाना ही जिंदगी है ।

सोचो खाने में नमक नहीं तो

जैसा लगेगा खाने एसे ही 

लगेगी जिंदगी अगर न रुठना

और न मनाना  हो ।

सोचो नमक ज्यादा हो जाये तो 

जैसा लगेगा खाना एसे ही लगेगी

जिंदगी,जब रुठना मनाना हो ज्यादा ।

सोचो नमक कम हो जाये तो 

जैसा लगेगा खाना एसे ही लगेगी

जिंदगी, निरस और बेस्वाद  ।

सोचो नमक प्रमाणसर हो तो 

जैसा लगेगा खाना एसे ही लगेगी

जिंदगी,जब रुठना मनाना हो प्रमाणसर ।

रुढना मनान भी हो लेकिन क्षणीक, 

पल में रूढना पल में मान जाना तो

जिंदगी लगती है मीठी और स्वादिष्ट ।

ध्यान रहे रुठना-मनाने में कभी 

प्रेम न हो कम बलकी, ओर बढे 

और जिंदगी सँवरें ।

विनोद आनंद                                 18/08/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

 

870 वो बदनसीब जो….. 

वो बदनसीब है जो मिला है 

नसीब से उसे खुश नहीं है ।

कई असंतोषी ज्यादा पाने कि 

ख्वाईस में जो है उस से जीवन 

जीने का समय नही मिलता ।

जल कि मछली जल में प्यासी ।

वो बदनसीब है जो अभिमानी, 

क्रोधीत और ईर्षाळु स्वभाव से 

जीवन में जो मिला है नसीब से 

उस का लुफ्त नही उठा पाते ।

प्यासा कूँवे के पास ही प्यासा ।

वो बदनसीब है जो मिला है नसीब से

उस कि किंमत नही समजता और

कुसंग से व्यसनी और आवारा

बन के जिंदगी में जो मिला है, 

उस का लुफ्त नही उठा पाता ।

भूखा भोजनायल में ही भूखा ।

वो बदनसीब है जो मिला है किंमती

जीवन वो नादानी में  एसो आराम, 

मोज मस्ती में बीत देता है ।

सब कुछ होते हुए भी नाकामीयाब 

नालायाक बन के जिंदगी लुटाता है ।

नसीबदार खुद बदनसीब बनता है ।

ईन्सान खुद किस्मत बनाता है

जो मिला है उसे खुश होकर, 

कर्मो से नई किस्मत बनानी है ।

यही है जिंदगी का रहस्य  ।

विनोद आनंद                                08/08/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

816 बहेतरीन तरीका जीने का 

जीने का  बहेतरीन तरीका कौनसा ? 

जीओ और जीने दो, 

हसो और हसाओ

खुस रहो खुस रखो, 

है बहेतरीन तरीका जीने का ।

जीने का  बहेतरीन तरीका कौनसा ? 

न फसो न फसाओ, 

न रोओ न रूलाओ, 

न दु:खी हो न दुःखी करो, 

माफ करो दो, माफि मागीलो, 

प्रेम करो, प्रेम पामो, 

है बहेतरीन तरीका जीने का ।

जीने का  बहेतरीन तरीका कौनसा ? 

मैं ओ.के. तुम भी ओ.के, 

मैं जीतु तुम भी जीतो, 

मैं स्वीकार करू तुम्हे, 

तुम भी स्वीकार करो मुझे ।

मैं सहन करू तुम्हे, 

तुम भी सहन करो मुझे ।

है बहेतरीन तरीका जीने का ।

जीने का  बहेतरीन तरीका कौनसा ? 

मैं न रूठू  तुम्हे से

तुम भी न रूठो मुझसे ।

मैं खुस रखु तुम्हे, 

तुम भी खुस रखो मुझे ।

मैं न शिकायत करू  तुम्हे, 

तुम भी न करो शिकायत मुझे ।   

विनोद आनंद                                20/06/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

801 दाग

जैसे दाग कपडे पे, धूल ने 

कि तुरंत कोशिश करते है 

एसा नही किया तो

कपडे पे दाग पे दाग

लगते जाएँगे और 

कपडे का रंग या

सुरत बदल जाएगी ।

एसे जिंदगी में कई 

दाग लगते रहते है 

लेकिन उसे धूल ने कि 

कोशिश नही करते और

दाग ईतने बढ जाते है

कि जिंदगी का रंग-ढंग

बदल जाता है और 

जीना मुश्केल हो जाता है ।

जब भी दुर्गुण का दाग लगे

तो तुरंत धूलने कोशिश करे 

तो निकल शकता है । हो शके

तो जिंदगी पे सद् गुणों का 

टिका लगाने का प्रयाश करना ।

जिंदगी दाग रहीत और सद् 

गुणों के टिको से चमकेगी ।

विनोद आनंद                                 05/06/2017

फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

797 अपनी शक्ति को जगाओ

हम बहोत जल्दी 

चिड जाते है 

बातों बातों में 

गुस्से हो जाते है,क्यूँ ? 

क्या हर वक्त एसा

जरूरी होता है ? 

कि हम एसी ही

आदतों के शिकार

हो गए है या हमने 

अपना स्वभाव 

एसा बना लिया है ? 

क्या एसी आदते और

स्वभाव सुख, शांति और

चैन, शुकुन देता है ? 

तो फिर कमजोर बनकर

क्यूँ एसी आदतें-स्वभाव के 

साथ जी रहे है ।

हम एक शक्ति स्वरूप है

अपनी शक्ति को पहेचानो

जगाओ कि अपनी

खराब आदतें-स्वभाव 

बदल शके और सद्

गुणों के मालिक बन शके ।

एक सुख, शांति,चैन और

शुकुन सी जिंदगी जी शके ।

विनोद आनंद                                 02/06/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

 

793 जिंदगी कि बाज़ी जीतलो

क्या पकडाना है ? 

जो छोडना चाहे, 

उसे पकडो ।

क्या छोडोना है ? 

जो पकडना चाहे, 

उसे छोडो ।

जो खराब है,उसे छोडो ।

जो अच्छा है,उसे पकडो ।

अहंकार को छोडो, 

स्वमान को पकडो ।

जो सही है,उसे पकडो ।

जो  गलत है,उसे छोडो ।

प्रेम को पकडो,मोह को छोडो ।

मित्रताको पकडो,शत्रुताको छोडो ।

जो जूठ्ठ  है,उसे छोडो ।

जो सच है, उसे पकडो ।

संसार कि माया को छोडो, 

ईश्र्वर कि भक्ति को पकडो ।

लोभ-लालच को छोडो

संतोष-शांति को पकडो ।

द्वेष-ईर्षा को छोडो

दया-करूणा को पकडो ।

कुसंग को छोडो, 

सत्संग को पकडो ।

जिसे छोडना है उसे

छोडने कि हिंमत रखो

जिसे पकडना है उसे

पकडने कि जिद करो ।

अगर यह होने लगा तो

समजना कि जिंदगी कि

बाज़ी आपने जीत ली ।                                         

विनोद आनंद                                 30/05/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

790 लक्ष्य तयर करो

बीना पता और कुछ 

कुछ निशानी दे कर हम 

घर ढूँढते है, मगर 

घर नही मिलता ।

घर ढूँढना है तो पता

पहेले ढूँढना होगा ।

बस ईसी तरह हम

जिंदगी में  मंझिल ढूँढते है 

पर नही मिलती क्यूकिं 

लक्ष्य निर्धारीत नही है

हम लक्ष्य हीन जिंदगी के

सफर में  मंझिल ढूँढते है ।

जिंदगी में क्या बनना है

क्या करना है जिंदगी और

कैसे जीना है तयर नही है ।

तो फिर जिंदगी का कोई

हेतु या उद्देश्य नही होता ।

जिंदगी में  सफलता और

सार्थकता के लिए लक्ष्य 

निर्धारीत करना आवश्यक है ।

लक्ष्य हीन जीवन तो जानवर

जीते है । हम तो ईन्सान है ।

जिंदगी को लक्ष्य हीन न जीओ ।

विनोद आनंद                                 28/05/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड