2139 कल्पवृक्ष

कल्पना करना न छोडना
कल्पना कल्प वृक्ष है जिस
पर खिलते विचारों के फूल,
और विचारों के फूलों से
स्वप्नों के फल लगते है ।
ईसलिए कल्पना करो, उस
पर विचार करो और उस के
स्वप्ने देखो,और उसे साकार
करने का पक्के ईरादे रखो ।
शुरू करो सफलता का सफर ।
सफर कठीन है, तो ऊमीद का
दिया बुझने न देना, आशा का
दिप जलाए रखना और महेनत
कि साधना करना न छोडना ।
चलते रहेना चलते रहेना जब
तक कल्पना के कल्प वृक्ष के
स्वप्ने साकार न हो, यही सही
तरिका है जिंदगी जीने का ।
कल्प वृक्ष से जो मागोगे वो
अवश्य मिलेगा जब दिमाग कि
जमी पर कल्पना के बीज
बोओखे और श्रध्धा और विश्र्वास
के जल से सिचना तो जिंदगी के
बृक्ष पे फल लगेंगे सफलता के ।
विनोद आनंद 09/08/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

2114 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-99

🌹 जिंदगी कि किताब
मन कि बात कभी तो
होंठो पे आ हि जाती है ।
दिल का राज़ कभी तो
आंशू बन कर बहेगा हि ।
मन कि बातें और दिल में
छूपी भावनाएँ चहेर पे कभी
तो आ हि जाएगी ,तो क्यूँ
न जिंदगी कि किताब खूली
रखे, जो मन में और दिल में
है वो न छूपाए ।
🌻 मकसद
स्वप्ने देखते रहो साकार
करते रहो सभी स्वप्ने
साकार नहि होते कोई
बात नहि, दूसरे स्वप्ने को
साकार करने कि सोचो ।
जीवन में स्वप्नो कि कमी
नहि सिर्फ देखने वाले और
साकार करने वाले कि कमी है ।
जिंदगी का मकसद हि स्वप्ने
देखना और साकार करना है ।
🌺 एकदम
जब रोते हो तब एकदम
कच्चे लगते हो ।
जब मुस्कारते हो एकदम
बच्चे लगते हो
जब हसते हो तो एकदम
अच्छे लगते हो ।
जब रोते को हसाते हो तो
एकदम सच्चे लगते हो ।
विनोद आनंद 26/07/2020
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2097 सही अंदाज,सही पसंदगी

🌹 सही अंदाज
तेरी भी वाह वाह,
मेरी भी वाह वाह ।
तेरी भी जीत और
मेरी भी जीत ।
तू भी खुस, मैं भी खुस ।
तू भी कमा मैं भी कमाऊ ।
तू भी जीओ,मैं भी जीऊ ।
तूम भी ऑके मैं भी ऑके
सही अंदाज है जीने का ।
🌻 पसंदगी आप कि
अच्छी सोच अच्छे कर्म का
बीज, अच्छे कर्म सफलता
का वृक्ष और जीवन में सुख
शांति कि छाया ।
बूरी सोच बूरी कर्म का बीज,
बूरे कर्म बरबादी का वृक्ष
और जीवन में दुःख और
अशांति कि धूप ।
अच्छि सोच ईन्सान बनाए
बूरी सोच शैतान बनाए ।
पसंदगी आप कि अच्छी
सोच के बूरी सोच ।
सही अंदाज और सही
पसंदगी जिंदगी आबाद ।
गलत अंदाज और गलत
पसंदगी जिंदगी बरबाद ।
स्वयंम विचार कि जीएगा ।
विनोद आनंद 14/07/2020
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2091 मोक्ष कहते है जिसे…

मोक्ष कहते है जिसे वो
सिर्फ है मोह का क्षय,
मतलब मोह का त्याग ।
मोह कहते है जिसे वो
सिर्फ है आशक्ति व्यक्ति
वस्तु और संसार के प्रति ।
आशक्ति कहेते है जिसे वो
सिर्फ है पागलपन व्यक्ति,
वस्तु, और संसार के प्रति ।
मोक्ष कहते है जिसे वो सिर्फ
है मन कि गुलामी से मुक्ति ।
मन कि गुलामी मतलब मन
कि मन मानी और हुकूमत ।
मन पर हकूमत हि है मोक्ष
मोक्ष कहते है जिसे वो है
सिर्फ काम, क्रोध और लोभ
जैसे कसाई से छूटकारा ।
प्रेम, दया, करूणा, संतोष
और शांति जैसे सद् गुणों
से प्रति हि है मोक्ष ।
मोक्ष कहते है जिसे वो है
निष्काम कर्म जो है बंधन
मुक्त कर्म, हि है मोक्ष ।
मोक्ष कहते है जिसे वो है
सिर्फ जिंदगी कि मंझिल और
जिंदगी जीनेका सहि तरिका ।
विनोद आनंद 08/07/2020
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