948 परेशानीयाँ

परेशान है सब टि.वि देखते

जाहेरातों से जहाँ भी देखो

वहाँ जाहेरात होती है ।

परेशान है सब महेंगाई से

और ओफिस में 8 धंटो के 

बदले 12 धंटे काम करने से ।

थके घर आकर सो जाना, 

फिर कब जीएगें जिंदगी ।

हालात कुछ एसे हो गए है कि

परेशानी पिछा नही छोडती ।

जीवन कि पसंद और जीवन

शैली एसी विकृत हो गई है कि

बिमारीयाँ बढ रही है और 

रिश्तों में  तनाव है और 

रिश्तें कमजोर पड जाते है 

तो परेशानीयाँ तो होगी ।

परेशानीयाँ कैसे कम होगी ? 

जीवन में शांति, संतोष और

समज से मन नियंत्रण रखने से ।

जरूरियात कम करने से, 

अपेक्षाओं को कम करने से, 

और रिश्तों को संभालाने से  ।

जीवन जीने के लिए अच्छि

जीवनशैली का निर्माण करना है 

तो पेरेशानीयों से पिछा छूटेगा ।

वरना जिंदगीमें परेशानियाँ 

जानलिवा बन शकती है ।

परेशानीयों से परेशान मत होना 

वो तुम्हारी ताकात से बडी नही है ।

कमजोर होकर परेशानीयों से 

डरना नही डटके सामना करना है ।

विनोद आनंद                               20/10/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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💐941 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-44

 🌹 पहेली

जिंदगी के हर पहेलु है पहेलवान

अगर तुम पड गए कमजोर ।

जिंदगी के हर पहेलु को समकर

जिओगे तो जिंदगी पहेली 

नही बनेगी, पहेलवान बनेगी ।

🌻 चहेरा

चहेरे पे चहेरा लगाते है लोग, 

कोनसा चहेरा है असली  

कैसे जाने ? जो दिखता है

वो नही हो शकता असली ।

कोई बात नही बस आँख 

बध करके विश्र्वास न करो ।

🌺 गीरगीट

किस को अपना समजे

किस को पराया ? 

वक्त आने पर बदल जाए और

गीरगीट कि तरह रंग बदले वो

है पराया भले वो हो अपना ।

न रखना उमीद अपनापन कि ।

विनोद आनंद                               05/10/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

930 दिन एक सोने का सिक्का

ईश्र्वर हर दिन हर सुबह 

सभीके के हथेली में एक 

सोने का सिक्का रखेते है ।

कहेता है बेटे उसे खर्च करके

जिंदगी में कुछ कमाओ ।

दिए हुए दिन के सिक्को से

न कुछ पूण्य, दुवा, और

आशीर्वाद नहीं  कमाया

तो वो सोनेका सिक्का

सामको वापिस ले लेगा

और जिंदगी के खाते में 

कुछ भी नहीं जमा होगा ।

जिंदगी के कुल सोने के

सिक्को में एक सिक्का 

कुछ जमा किए बीना 

गवाँ दिया, सावधान 

हर सोने के सिक्को 

हर दिन कुछ न कमालो

वरना एक दिन सोनेका

यूहि खर्च किए बीना 

खत्म हो जाएगा कुछ

जिंदगी के खाते में जमा

किए बीना, सावधान 

आज से सोने के सिक्के से

पूण्य, दुवा, आशीर्वाद 

कमाना शरू करदो ।

विनोद आनंद                                   26/09/2017 फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

901 फूरसद नहिं

लिख ने वाले लिखते है

अपनी अच्छि सोच को दूर 

दूर तक पहोंचाने के लिए ।

एसी उमिद से कि हर

कोई पढे और मन में 

ह्रदय में बसाकर एक 

अच्छि सोच बनाए ।

अच्छि सोच हि जीवन में 

अच्छे कर्मो का बीज है ।

लिखनेवाला अच्छि सोच का

बीज मन कि जमीन में  

बोना चाहता है जिसे 

जिंदगी में सत्कर्मो कि

फसल तैयार हो जिसे

जिंदगी में सफलता और

समृध्धि कि दोलत मिले ।

अच्छि सोच और अच्छे

सुविचार सभी को लगते है 

अच्छे मगर उस कि   

अच्छाई से जिंदगी को

सँवारने नी फूरसद नहि

किसी के पास और खुद में 

परिवर्तन लाने कि ईच्छा नहिं है । 

तो लिखनेवाला करे तो क्या करे  ? 

विनोद आनंद                                 30/08/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड 

897 जिंदगी जंग के स्वर्ग

जिंदगी जंग हम सिपाही ।

रहना है जागृत,चौकना और 

तैयार दुश्मनों से जंग खेलने को ।

अंदर दुश्मन, बहार दुश्मन ।

घर में दुश्मन,समाज में दुश्मन 

जहाँ आँख खोल के देखो

दुश्मन ही दुश्मन देखाई देंगे ।

जिंदगी को जंग बना देते है ।

अंदर के दुश्मन है….. 

काम, क्रोध, लोभ, मोह, 

मद और मत्सर-ईर्ष जो देते है

बहार के दुश्मन को जन्म ।

ईसलिए पहेले जंग खेलकर 

उन पर जीत हासील करनी है ।

फिर न होगा कोई बहारी दुश्मन ।

कैसे खेलेंगे जंग अंदर के दुश्मन से ।

जीवन में दुर्गुणो से मुक्ति, 

बूरी आदतों छूटकारा पाकर

सद् गुणी बनकर अपने 

व्यक्तित्व को निखारना है

सवाँरना है और जिंदगी का

जंग पर जीत हांसल करनी है ।

फिर न होगा कोई दुश्मन ।

सभी होंगे दोस्त फिर जिंदगी 

जंग नही है, जिंदगी स्वर्ग है                                     विनोद आनंद                                24/08/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड 

891 रुठना मनाना

रुठना-मनाना ही जिंदगी है ।

सोचो खाने में नमक नहीं तो

जैसा लगेगा खाने एसे ही 

लगेगी जिंदगी अगर न रुठना

और न मनाना  हो ।

सोचो नमक ज्यादा हो जाये तो 

जैसा लगेगा खाना एसे ही लगेगी

जिंदगी,जब रुठना मनाना हो ज्यादा ।

सोचो नमक कम हो जाये तो 

जैसा लगेगा खाना एसे ही लगेगी

जिंदगी, निरस और बेस्वाद  ।

सोचो नमक प्रमाणसर हो तो 

जैसा लगेगा खाना एसे ही लगेगी

जिंदगी,जब रुठना मनाना हो प्रमाणसर ।

रुढना मनान भी हो लेकिन क्षणीक, 

पल में रूढना पल में मान जाना तो

जिंदगी लगती है मीठी और स्वादिष्ट ।

ध्यान रहे रुठना-मनाने में कभी 

प्रेम न हो कम बलकी, ओर बढे 

और जिंदगी सँवरें ।

विनोद आनंद                                 18/08/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

 

870 वो बदनसीब जो….. 

वो बदनसीब है जो मिला है 

नसीब से उसे खुश नहीं है ।

कई असंतोषी ज्यादा पाने कि 

ख्वाईस में जो है उस से जीवन 

जीने का समय नही मिलता ।

जल कि मछली जल में प्यासी ।

वो बदनसीब है जो अभिमानी, 

क्रोधीत और ईर्षाळु स्वभाव से 

जीवन में जो मिला है नसीब से 

उस का लुफ्त नही उठा पाते ।

प्यासा कूँवे के पास ही प्यासा ।

वो बदनसीब है जो मिला है नसीब से

उस कि किंमत नही समजता और

कुसंग से व्यसनी और आवारा

बन के जिंदगी में जो मिला है, 

उस का लुफ्त नही उठा पाता ।

भूखा भोजनायल में ही भूखा ।

वो बदनसीब है जो मिला है किंमती

जीवन वो नादानी में  एसो आराम, 

मोज मस्ती में बीत देता है ।

सब कुछ होते हुए भी नाकामीयाब 

नालायाक बन के जिंदगी लुटाता है ।

नसीबदार खुद बदनसीब बनता है ।

ईन्सान खुद किस्मत बनाता है

जो मिला है उसे खुश होकर, 

कर्मो से नई किस्मत बनानी है ।

यही है जिंदगी का रहस्य  ।

विनोद आनंद                                08/08/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड