1667 सफलता कि तीन चाबी

जिंदगी का मक्सद है सफलता
कोई भी कारण हो सफलता का,
तीन लोगों है तो सफलता मिलेगी ।
सफल व्यक्ति के जीवन तीनों लोगों
का होना आवश्य होता हि है ।
1) सब से पहेले गुरू जो सहि
समय पर सहि तरीके से भूल
को सुधारते है और सहि राह
दिखाते है । स्वामी विवेकानंद
का गुरू राम किष्णा परमहंस,
और शिवाजी के गुरू राम दास ।
जीवनमें गुरू होना जरूरी है ।
2) दूसरा गाईडींग लाईट, जीवीत
हो या न हो लेकिन आंख बंध करे
तो मार्गदर्शन मिलता है, वो चाहे
ईश्र्वर हो या कोई प्रेरक सफलता
के लिए प्रोत्साहित करता है ।
3) तीसरा है तुम्हारे जीवन यानी
समय का हिसाब रखने वाला,
आपे लक्ष्य पे नजर रखने वाला,
और समय पर आप को सलाह
सुचन देने वाला तुम्हारी सफलता
के लिए प्रयत्न करने वाला तुम्हारा
सलाहाकार और सच्चा दोस्त ।
तीनों लोगों का संयोग-संगम हि
है सफलता कि चावी ।
विनोद आनंद 16/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1639 दस्तुर है कुदरत का

किसी को बेईज्जत करने से
ईज्जत कौन करेगा, ईन्सान
तो क्या भगवान भी ईज्जत
नहि करेगा । बेईज्जती से
ईज्जत नहि खरीद शकते ।
किसी का अपमान करके मान
पाने कि उमीद रखना मूर्खता है ।
किसी को दुःखी करके खुशी
का इन्तज़ार करना व्यर्थ है ।
किसी कि मुश्केली बढाकर
आराम या चैन कि चाहत
रखना बेवकूफि है । किसी का
बुरा करके अच्छा दोस्त पाने
का स्वप्ना देखना स्वप्न हि है ।
हर वक्त गुस्सा और नफरत का
सामान बांटने से प्रेम या शांति
नहि मील शकती ध्यान रखे ।
किस को धोखा देकर अपनों
से मुँह फेर लेने से अपनापन
नहि मिल शकता है । यह सब
नग्न बातें कहेती है कि जो
चाहिए वो हि देते रहो तो मन
चाहि चीजें मिलती हि रहेगी,
वरना तरसते रहोगे जिंदगी भर ।
पेड बबुल का लगाकर आम
कहाँ से खाओगे । जो दोगे वो
मिलेगा, दस्तुर है कुदरत का ।
विनोद आनंद 20/06/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1634 ईसलिए

एक गलत कदम का
परिणाम क्या होगा
सोच नहि शकते ।
फिर बाद में पस्ताने से
क्या फायदा ईसलिए
पहेला कदम सोच
समज कर बढाओगे तो
पस्ताना नहि पडेगा ।
एक गलत सोच जब भी
कर्म में परिवर्तित होगी
गलत कर्म हि करेगी,
ईसलिए गलत सोच
को तुरंत डफना दो तो
हि गलत कर्म से बचोगे ।
एक गलत शब्द किसी के
दिल के टूकडे टूकडे करदे
फिर रिश्तें बीखर जाए,
ईसलिए गलत शब्दो बोलने
वाली जुबा को दांतो तले
दबाकर रिश्तों को बचालो ।
एक गलत आदत जिंदगी को
कठीन बना देगी, ईसलिए गलत
आदतो से पीछा छूडाकर हि
जिंदगी आसान बना शकते हो ।
एक गलत निर्णय जिंदगी का
रूख बदल शकती है ईसलिए
सोच समजकर निर्णय लेना ।
एक गलती सज़ा बन कर
परेशान करेगी ईसलिए
गलती कि माफि मागकर,
सुधारकर परेशानी से बचो ।
हर एक गलत सोच, निर्णय
शब्द,आदत,गलती से दूर रह
कर जिंदगी को सँवार लो ।
विनोद आनंद 16/06/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1571 पवित्र त्रिवेणी संगम

गंगा,यमुना और सरस्वती
नदियों का त्रिवेणी संगम
बना है पवित्र तीर्थ स्थान ।
जिंदगी में भी कई त्रिवेणी
संगम हो तो, जिंदगी बने
सफल, सार्थक और पवित्र
तीर्थ स्थान बने जिंदगी ।
– जिंदगी में प्रेम, दया,करूणा
का त्रिवेणी संगम हो तो बने
जिंदगी पवित्र तीर्थ स्थान ।
– मन बुध्धि और आत्मा का हो
त्रिवेणी संगम हो तो, जिंदगी
बने पवित्र और संयमी ।
– मन,वचन और कर्म में एकता
का संगम हो तो जिंदगी बने
पवित्र और महान ।
– सद् विचार,सद् भाव और
सदाचरण का हो त्रिवेणी
संगम तो जिंदगी बने पवित्र
और यादगार तीर्थ स्थान ।
– सेवा, समर्पण और ईश्र्वर कि
शरणागति का त्रिवेणी संगम हो
तो बने जिंदगी पवित्र तीर्थ स्थान ।
जिंदगी में सभी त्रिवेणी संगम
हो तो जिंदगी बनेगी बेमिसाल,
पवित्र प्रेरणा का तीर्थ स्थान ।
विनोद आनंद 19/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1565 जिंदगी कि जीत

दिल है कि मानता हि नहि
मन है कि सुनता हि नहि
ईन्द्रिया है कि छोडती हि नहि
न जाने ज्ञान कहा छूप गया है
और बुध्धि कहाँ चलती गई ।
करे तो क्या करे जिवन सहि
चलता हि नहि ?
बस सहि सोच कि जरूरी है ।
ज्ञान को जगा के बुध्धि से
आत्मविश्र्वास से दिल-दिमाग
ईन्द्रयों को वश में करना है ।
नहि है यह ईतना आसान
फिर भी थान लो तो नहि है
ईतना मुश्केल, अभ्यास से ।
दिल-दिमाग, ईन्द्रयों पर संयम
से सहि जीवन जी शकते हो ।
प्रयास करलो, कोशिश करलो
कोशिश करने वाले हारते नहि ।
दिल मान जाएगा, मन तुम्हारी
बाते मानेगा, ईन्द्रियों से दाम
छूडा पाओगे, आत्म जागेगा ।
यहि श्रेष्ठ जीत है जिंदगी कि ।
विनोद आनंद 12/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1561 दाम्पत्य जीवन में सुख शांति-2

दाम्पत्य जीवनमें सुख शांति का ।
ओर उपाया,समज और शीख ।
* अपने हक या दूसरो के कर्तव्य
पर ज्यादा ध्यान देते है ।
सिर्फ हमे अपने कर्तव्य या दूसरे
के हक पर ज्यादा ध्यान देना है ।
* पति पत्नि जीवन रथ के दो पहिए
जैसे है, दोनों के साथ, सहकार और
सहयोग से रथ सुख शांति से चलेगा ।
* दाम्पत्य जीवन में प्रेम,समर्पण और
सेवा का त्रिवेणी संगम होना जरूरी है ।
* पति पत्नि एक दूसरों को जाने,समझे,
और भावनाओ कि करद करना शीखे ।
* दोनों के बीच गेर समझ न हो और
विश्वास का माहोल बना रहे ।
* दोनों एक दूसरों कि भूल या गलती
या फरियाद न करे लेकिन एक दूसरे
कि भूल हो तो माफ कर दे और
खूबीयो को देखे और सराहना करे ।
* पति पत्नि के साथ कई नए रिश्तें
बन जाते है सभी का मान सन्मान
करना और निभाने से हि दाम्पत्य
जीवन में सुख शांति आशकती है ।
* परिवार में धीरज सहन शीलता,
सही व्यवहार से, मेल जूलकर रहने
से परिवार में सुख शांति आशकती है ।
दाम्पत्य जीवन में सुख शांति हि
परिवार कि सुख शांति का बीज है ।
विनोद आनंद 07/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1560 दाम्पत्य जीवनमें सुख शांति-1

हर एक पति पत्नि चाहते है,
दाम्पत्य जीवन में सुख शांति ।
कहते है चाहने से सब कुछ
नहि मिलता लेकिन दाम्पत्य
जीवन में चाहने से सुख शांति
अवश्य मिल शकती है । कैसे ?
* पहेले तो चाहत हो बहुत तीव्र
और गहेरी और हो पाने कि पूर्व,
पूर्ण तैयारी कुछ भी करने कि ।
* दूसरी पति पत्नि का मतलब,
उसकी गरीमा और अपना अपना
कर्तव्य समज ने कि तैयारी हो ।
* हर कन्या चाहती है अच्छा पति
मगर नहि चाहती बनना अच्छी पत्नि ।
* हर कुमार चाहता है अच्छी पत्नि
मगर नहि चाहता बनना अच्छा पति।
* अच्छा पति-पत्नि कि तलाश है कठीन
अच्छा पति- पत्नि बनना है आसान ।
दाम्पत्य जीवन में सुख शांति का यह है
पहेला उपाय, समज और शीख ।
शर्त है तैयारी करनी है शादी से पहेले ।
* एक ओर तैयारी करनी है, व्यक्तित्व
विकास कि शादी से पहेले ।
ओर भी है बाकि उपाय, समज,शीख
पढे दाम्पत्य जीवन में सुख शांति-2
विनोद आनंद 06/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड